धूप के पाँव — आधुनिक अतुकांत एवं छंदमुक्त हिंदी कविता संग्रह
Dhoop Ke Paanv (Dhoop Ke Paon) — प्रकृति, श्रम, संबंध और आत्म-साक्षात्कार की 101 कविताएँ

पुस्तक विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शीर्षक | धूप के पाँव |
| अंग्रेज़ी शीर्षक | Dhoop Ke Paanv (Dhoop Ke Paon) |
| लेखक | आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) |
| भाषा | हिन्दी |
| कविताओं की संख्या | 101 |
| प्रकाशन वर्ष | 2026 |
| ISBN | 978-93-345-7574-3 |
| विधा | आधुनिक अतुकांत एवं छंदमुक्त कविता |
| प्रकाशक | अविकावनी पब्लिशर्स (Avikavani Publishers) |
पुस्तक के बारे में
“धूप के पाँव” आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) का अतुकांत एवं छंदमुक्त हिन्दी कविता-संग्रह है। लेखक का पूर्व कार्य पिंगल शास्त्र और रागनी परंपरा की छंदबद्ध रचनाओं पर केंद्रित रहा है। इस संग्रह में उन्होंने जान-बूझकर छंद और तुकांत के बंधन छोड़े हैं। इसकी 101 कविताएँ बाहरी तुकबंदी की जगह विचार की आंतरिक लय, बिंबों और यथार्थ-बोध पर टिकी हैं।
संग्रह में ‘धूप’ केवल रोशनी का प्रतीक नहीं, समय की निरंतर पदचाप है। वह सुबह की गुनगुनी छुअन के रूप में उम्मीद जगाती है, दोपहर में श्रम और संघर्ष की तपन बनती है, और ढलती सांझ में एकांत छोड़ जाती है।
संग्रह के प्रमुख विषय
- प्रकृति और परिंदों का भूगोल। ‘तिनके का भूगोल’, ‘नन्हीं चोंच का विहान’, ‘डाल का कंपन’ और ‘परिंदों की संगति’ जैसी कविताएँ फैलते कंक्रीट के बीच प्राकृतिक आवास के सिमटने और सांस लेने की जद्दोजहद को चित्रित करती हैं।
- कंक्रीट का संत्रास और सामाजिक विसंगतियाँ। ‘चौपाल का मौन’, ‘दूरियों का पुल’, ‘माँ की थाली’, ‘पुराना सहारा’ और ‘वृद्ध आँखों का विश्राम’ में आधुनिक जीवन की उस उपेक्षित पीड़ा को स्वर दिया गया है, जो भौतिक प्रगति के शोर में दब जाती है।
- श्रम, संघर्ष और अस्तित्व। ‘खेत में पकता सोना’, ‘थके मजदूर का संसार’, ‘पगडंडी का अकेलापन’ और ‘धूल का बवंडर’ आम आदमी के पसीने, संघर्ष और जिजीविषा को सीधे ढंग से सामने रखती हैं।
- दार्शनिक अंतर्दर्शन और आत्म-साक्षात्कार। ‘दूधिया खामोशी’, ‘अक्स का सच’, ‘रेत की प्यास’, ‘सन्नाटे की नाव’ और ‘आधी रात की चौंक’ जैसी कविताएँ व्यक्ति को सामाजिक मुखौटों से हटाकर उसके भीतर के मौन एकांत से जोड़ती हैं।
अतुकांत और छंदमुक्त कविता: संक्षेप में
छंदमुक्त होने का अर्थ यहाँ शिल्प की अनदेखी नहीं है। कविता बाहरी ढाँचे के बजाय भाव और विचार की आंतरिक लय को साधती है। इन कविताओं में शब्दों का चयन तुकांत मिलाने के लिए नहीं, बल्कि अलगाव, पीड़ा और संघर्ष जैसे अनुभवों को सीधे व्यक्त करने के लिए किया गया है।
किनके लिए
यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो समकालीन हिन्दी कविता में प्रकृति, बदलते मानवीय संबंधों, श्रम और आत्म-चिंतन के विषयों में रुचि रखते हैं, और छंदमुक्त काव्य-शिल्प को पढ़ना चाहते हैं।
लेखक परिचय
आनन्द कुमार आशोधिया (‘कवि आनन्द शाहपुर’) स्वतंत्र लेखक, कवि और शोधार्थी हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना में 32 वर्ष सेवा की। वे हरियाणवी लोक-काव्यशास्त्र, पिंगल शास्त्र, भाषा-विज्ञान और वाचिक परंपराओं के दस्तावेज़ीकरण पर कार्य करते हैं। उनके शोध-परिचय के लिए यहाँ देखें।
उद्धरण कैसे दें
Ashodhiya, Anand Kumar. (2026). Dhoop Ke Paanv. Avikavani Publishers.
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