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Tuesday, April 19, 2016

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Monday, October 19, 2015

मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ

मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ

तुम लिखते रहो मैं पढ़ती रहूँ, सपनों की गागर भरती रहूँ । 
तुम गाओ तराने प्यार के, मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ ॥ 

हर बार तमन्ना होती है कि, लगा पंख कहीं उड़ जाऊं । 
तेरी बाहों के सशक्त घेरे में, कभी जलूं कभी बुझ जाऊं ॥ 
तेरी छाती पे सर रख के बस आँख मूँद तुझे सुनती रहूँ ॥ 
 तुम गाओ तराने प्यार के, मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ ॥ 

कभी रीती, कभी भरी भरी, कभी सुस्ती कभी अलसाऊं । 
कभी धधकती, कभी सुलगती, कभी खुदी में जल जाऊँ ॥ 
तेरे ओज की इस ऊर्जा में, शनैः शनैः मैं भुनती रहूँ । 
तुम गाओ तराने प्यार के, मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ ॥ 

तुम लिखते रहो मैं पढ़ती रहूँ , सपनों की गागर भरती रहूँ । 
तुम गाओ तराने प्यार के, मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ ॥ 
रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015-16

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Posted by New Hindi Songs Geet Kavita on Tuesday, 20 October 2015
Email : anandkavianand@gmail.com



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Sunday, September 27, 2015

ना जाने क्यूँ


ना जाने क्यूँ

इक छवि पलकों की कोर तक आके जा रही है।
दूर खड़ी हो अधरों से खुद ही मुस्कराए जा रही है।
प्यारी सी मनमोहक अदा लिए मन को रिझा रही है।
ना जाने क्यूँ फिर भी पास आने से हिच किचा रही है।

तुम बांधो तारीफों के पूल फिर हो के खुश भी क्या करना।
जब तुम ही हासिल नहीं जग में तो ऐसे जहाँ का क्या करना।
अब आके गले लगाले मौत फिर घुट घुट जी के क्या करना।

नदी के मुहाने पे खड़ा सोचता हूँ की वो धारा कब आएगी 
जब लाएगी चैन ओ सुकून और ज़िन्दगी महकाएगी 

खुदा करे वो दिन जरूर आये और मेरे इस सपने को साकार कर जाए 
या तो नदी ही किनारे से दो चार हो जाए या खुद किनारा ही नदी में समा जाए 

रचियता : आनंद कवि आनंद 




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