हरियाणवी लोक-साहित्य और पिंगल शास्त्र का अकादमिक संगम! 🎓📖
हरियाणवी लोक-साहित्य और पिंगल शास्त्र का अकादमिक संगम! 🎓📖
मुझे यह साझा करते हुए अत्यंत गौरव और हर्ष हो रहा है कि मेरा नवीनतम शोध-पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities' में प्रकाशित हुआ है।
शोध का विषय: "हीर–राँझा की हरियाणवी रागणी परंपरा: पिंगल शास्त्र के आलोक में एक सांस्कृतिक विश्लेषण (रागणी 8–16 के संदर्भ में)"
हरियाणवी रागणी को अक्सर केवल 'लोक-मनोरंजन' समझा जाता है, परंतु इस शोध के माध्यम से मैंने यह स्थापित करने का प्रयास किया है कि हमारी यह रागणी परंपरा पिंगल छंदशास्त्र के कड़े मानकों पर कितनी सटीक और समृद्ध है। यह न केवल हमारी संस्कृति का दस्तावेजीकरण है, बल्कि लोक-साहित्य को वैश्विक शैक्षणिक मंच (Academic Platform) पर स्थापित करने की एक छोटी सी कोशिश है।
अकादमिक विवरण:
🔹 जर्नल: ShodhPatra (International Journal of Science and Humanities)
🔹 प्रकाशन तिथि: 16 अप्रैल 2026
यह उपलब्धि केवल मेरी नहीं, बल्कि उन सभी लोक-कलाकारों और बुजुर्गों की है जिन्होंने अपनी संस्कृति को जीवित रखा। मेरा सपना है कि हरियाणवी साहित्य और व्याकरण को उसका उचित शैक्षणिक गौरव प्राप्त हो।
आप सभी का निरंतर स्नेह और आशीर्वाद मुझे इस कठिन डगर पर चलने की प्रेरणा देता है। आभार! 🙏
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