हरियाणवी लोक साहित्य के संरक्षण में एक और शैक्षणिक उपलब्धि! 🎓📖
हरियाणवी लोक साहित्य के संरक्षण में एक और शैक्षणिक उपलब्धि! 🎓📖
मुझे यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि मेरा नवीनतम शोध पत्र 'Research Review International Journal of Multidisciplinary' (International Peer-Reviewed Journal) के अप्रैल 2026 अंक में प्रकाशित हुआ है।
शोध का विषय: Heer-Ranjha in the Haryanvi Ragni Tradition: A Cultural Analysis in the Light of Pingal Shastra.
यह शोध पत्र हरियाणवी रागनी परंपरा को पिंगल शास्त्र (भारतीय छंदशास्त्र) के आलोक में विश्लेषित करता है। यह कार्य न केवल हमारी समृद्ध मौखिक लोक परंपराओं को एक अकादमिक आधार प्रदान करता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि हमारी लोक-भाषाएँ और रागनी साहित्य किसी भी अन्य शास्त्रीय विधा की तरह ही गहन और शोध-योग्य हैं।
उपलब्धि के मुख्य बिंदु:
✅ Double-Blind Peer-Reviewed: अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा शोध।
✅ लोक साहित्य का शास्त्र-सम्मत विश्लेषण: रागनी 23–28 के माध्यम से पिंगल शास्त्र का प्रयोग।
✅ सांस्कृतिक संरक्षण: अपनी संस्कृति को वैश्विक फलक पर स्थापित करने का एक छोटा सा प्रयास।
सैनिक जीवन के अनुशासन से लेकर साहित्यिक और शैक्षणिक संरक्षण तक, मेरी यह यात्रा निरंतर जारी है। इस शोध को अकादमिक मान्यता मिलने से मेरा उत्साह और बढ़ गया है।
आप सभी का समर्थन और स्नेह मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
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