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Tuesday, February 3, 2026

अथ मार्जरिका उवाच: भारतीय इतिहास का प्रतीकात्मक महासंग्राम - आनन्द कुमार आशोधिया

 

अथ मार्जरिका उवाच: भारतीय इतिहास का प्रतीकात्मक महासंग्राम

अथ मार्जरिका उवाच: भारतीय इतिहास का प्रतीकात्मक महासंग्राम

(वृहद महाकाव्य — आदिकाल से 2025 तक)

"मार्जरिका ने कहा..." — एक क्रांतिकारी साहित्यिक नवाचार

क्या इतिहास केवल तारीखों का ढेर है, या प्रतीकों की रहस्यमयी भाषा?

आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) की नवीनतम कृति अथ मार्जरिका उवाच हिंदी साहित्य में अभूतपूर्व प्रयोग है। यह आदिकालीन आर्यावर्त से 2025 के 'अमृत काल' तक के संपूर्ण भारतीय कालक्रम को 198 मानकीकृत प्रतीकों के माध्यम से डिकोड करती है।

ISBN: 978-93-5619-397-0 | अविकावनी प्रकाशन | 2025

मार्जरिका: समय की तटस्थ साक्षी

मार्जरिका (काल-जयी बिल्ली) — नायक, नायिका, और कथावाचक। यह संपूर्ण महाकाव्य उसके मुख से निकलता है, जो:

✅ शुष्क ऐतिहासिक तथ्यों से परे → राष्ट्र की चेतना को टटोलता है

✅ 'श्वेत कपोतों' (प्रारंभिक स्वतंत्रता) से 'महाबाघों' (आधुनिक पौरुष) तक

✅ 'रानी की तानाशाही', 'मौन कपोत' शासन से 'डिजिटल यज्ञ', 'नभ-सारथी' तक

✅ राज्यों को भौगोलिक सीमाओं से परे → 'दर्रों की भूमि' से 'धरती का स्वर्ग'

प्रतीक-कोष: साहित्यिक क्रांति के 198 प्रतीक

विशेषता #1: पुस्तक के अंत में मानकीकृत प्रतीक कोष — जटिल राजनीतिक/सामाजिक परिवर्तनों को साहित्यिक रूप।

उदाहरण:

🌑 रानी की तानाशाही → Emergency 1975-77

🕊️ मौन कपोत → राजनीतिक मौनता  

⚡ डिजिटल यज्ञ → Digital India  

🚀 नभ-सारथी → Chandrayaan Missions

लेखक:  आनन्द कुमार आशोधिया

🇮🇳 पूर्व IAF वारंट ऑफिसर | पिंगल शास्त्र विशेषज्ञ | अविकावनी प्रकाशन संस्थापक

32 वर्षीय वायुसेना सेवा के बाद हिंदी-हरियाणवी साहित्य को समर्पित। हरीाणवी साहित्य रत्न (2025) सम्मान प्राप्त।

यह पुस्तक किसके लिए?

👨‍🎓 IAS/PCS अभ्यर्थी — वस्तुनिष्ठ इतिहास दृष्टिकोण
📚 राजनीति विज्ञान शोधार्थी — प्रतीकात्मक विश्लेषण
✍️ कवि/साहित्यकार — नवाचारपूर्ण छंद विधा
🇮🇳 जागरूक नागरिक — राष्ट्र-रथ का निष्पक्ष चित्रण

नेटवर्क के लिए महत्व

💼 नेतृत्व → प्रतीकात्मक सोच के उदाहरण

🎯 नीति-निर्माता → ऐतिहासिक नीतियों का पुनर्पाठ

🌐 वैश्विक दृष्टि → भारत का 5000 वर्ष यात्रा

प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर कॉर्पोरेट रणनीति तक — यह महाकाव्य प्रतीकात्मक चिंतन का संदर्भ ग्रंथ है।

📩LinkedIn Profile

Goodreads 

Amazon Author Central 

Github Website 


🌐 पुस्तक लिंक: Google Play | Pothi

#अथमार्जरिका उवाच #भारतीयइतिहास #हिंदीमहाकाव्य #आनन्दकुमारआशोधिया #अविकावनीप्रकाशन #HaryanviLiterature #IafVeteran

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Sunday, December 28, 2025

अथ मार्जरिका उवाच: भारतीय इतिहास का प्रतीकात्मक महाकाव्य

 अथ मार्जरिका उवाच: भारतीय इतिहास का प्रतीकात्मक महाकाव्य

अथ मार्जरिका उवाच: भारतीय इतिहास का प्रतीकात्मक महाकाव्य

आदिकाल से 2025 तक आर्यावर्त की चिरंतन चेतना

Author: Anand Kumar Ashodhiya
Publisher: Avikavani Publishers
ISBN: 978-93-5619-397-0
Publication Year: 2025

भारतीय साहित्य में बहुत कम कृतियाँ ऐसी होती हैं जो इतिहास, दर्शन और काव्य को एक साथ साधने का साहस करती हैं। “अथ मार्जरिका उवाच”, कवि एवं इतिहास-दृष्टा Anand Kumar Ashodhiya की ऐसी ही एक वृहद महाकाव्यात्मक रचना है, जो आदिकाल से लेकर 2025 तक भारतीय इतिहास का एक प्रतीकात्मक पुनर्पाठ प्रस्तुत करती है।

यह कृति केवल छंदों का संकलन नहीं, बल्कि आर्यावर्त की सामूहिक चेतना का साहित्यिक घोष है—जहाँ सभ्यता का उदय, मध्यकालीन संघर्ष, औपनिवेशिक दासता, स्वतंत्रता संग्राम, विभाजन, लोकतंत्र और आधुनिक भारत एक सतत काव्यात्मक प्रवाह में रूपांतरित होते हैं।

प्रतीकात्मक इतिहास: एक अनूठी साहित्यिक विधा

इस महाकाव्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका Symbolic Reinterpretation Framework है। इतिहास की घटनाओं, विचारधाराओं और शक्तियों को 198 विशिष्ट प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है—जैसे श्वेत कपोत, महाबाघ, मौन कपोत, नभ-सारथी
ये प्रतीक किसी व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि युग, विचार और शक्ति-संतुलन को दर्शाते हैं। इससे इतिहास आरोपों से ऊपर उठकर दार्शनिक विमर्श बन जाता है।

सत्य, शोध और साहित्यिक उत्तरदायित्व

Anand Kumar Ashodhiya, पूर्व Warrant Officer, Indian Air Force, इस महाकाव्य में इतिहास के सत्य के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता रखते हैं। सभी घटनाएँ वही हैं जो सार्वजनिक अभिलेखों, संसद और समकालीन विमर्श में दर्ज हैं।
यह कृति न तो राजनीतिक प्रचार है, न ही पक्षपात—यह साहित्यिक साधना और ऐतिहासिक संरक्षण का प्रयास है।

पुस्तक विवरण

  • पुस्तक का नाम: अथ मार्जरिका उवाच

  • विधा: प्रतीकात्मक महाकाव्य

  • ISBN: 978-93-5619-397-0

  • प्रकाशन वर्ष: 2025

  • Author & Publisher: Anand Kumar Ashodhiya

  • Imprint: Avikavani Publishers

  • स्थान: शाहपुर तुर्क, सोनीपत, हरियाणा

“अथ मार्जरिका उवाच” उन पाठकों के लिए है जो इतिहास को केवल घटनाओं की सूची नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा की निरंतर यात्रा के रूप में पढ़ना चाहते हैं।

आनंद कुमार अशोदिया एक कवि, अनुवादक और भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड वारंट ऑफिसर हैं, जिन्होंने तीन दशकों से ज़्यादा समय तक शानदार सेवा दी है।

अविकावनी पब्लिशर्स के संस्थापक, वह हिंदी, हरियाणवी और अंग्रेजी में लिखते हैं, और लोक परंपराओं, देशभक्ति कविता और नैतिक गीतों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। वह अंतर्यात्रा - द इनर जर्नी और कई अन्य मशहूर साहित्यिक कृतियों के लेखक और अनुवादक हैं।

भारत में रहते हुए, वह आधुनिक प्रकाशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए भारत की स्थानीय साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने का काम करते हैं।

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Friday, December 26, 2025

अथ मार्जरिका उवाच: भारतीय इतिहास का एक अभूतपूर्व प्रतीकात्मक महाकाव्य

 

अथ मार्जरिका उवाच: भारतीय इतिहास का एक अभूतपूर्व प्रतीकात्मक महाकाव्य
अथ मार्जरिका उवाच: भारतीय इतिहास का एक अभूतपूर्व प्रतीकात्मक महाकाव्य

क्या आप भारत के इतिहास को एक नए और निष्पक्ष दृष्टिकोण से देखना चाहते हैं?

'अथ मार्जरिका उवाच' (The Cat Speaks) मात्र एक कविता संग्रह नहीं, बल्कि साहित्य जगत में एक क्रांतिकारी नवाचार है। यह संभवतः हिंदी साहित्य के इतिहास में पहली बार हुआ है कि आदिकाल के आर्यावर्त से लेकर 2025 के 'अमृत काल' तक के संपूर्ण भारतीय कालक्रम को एक विस्तृत 'प्रतीकात्मक पुनर्पाठ' (Symbolic Reinterpretation) के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

इतिहास, जब कविता बनकर बोलता है

समय की साझीदार और तटस्थ प्रेक्षक 'मार्जरिका' (एक काल-जयी बिल्ली) के मुख से निकली यह गाथा शुष्क ऐतिहासिक तथ्यों से परे जाकर राष्ट्र की सामूहिक चेतना को टटोलती है। इस महाकाव्य की सबसे बड़ी शक्ति इसका 198 मानकीकृत प्रतीकों का 'प्रतीक-कोष' है। यहाँ व्यक्तियों और दलों को उनके वास्तविक नामों के बजाय विशिष्ट प्रतीकों में ढाला गया है, ताकि विमर्श व्यक्ति-केंद्रित न रहकर दार्शनिक और वैचारिक बन सके।

आप इस महाकाव्य में क्या पाएंगे?

  • अनादि काल से आधुनिक युग: सिंधु सभ्यता और वैदिक काल की नींव से लेकर मध्यकाल के संघर्ष और ब्रितानिया की दासता तक का सजीव चित्रण।
  • लोकतंत्र का महासंग्राम: स्वतंत्रता के बाद 'श्वेत कपोतों' के युग से लेकर 'बाघों' के उभार और 'रानी की तानाशाही' (आपातकाल) का बेबाक वर्णन।
  • समकालीन भारत (2014-2025): 'महाबाघ' का युग, निर्णायक राजनीतिक प्रहार, 'डिजिटल यज्ञ' और 'नभ-सारथी' (अंतरिक्ष अन्वेषण) जैसी आधुनिक उपलब्धियों का काव्यमय लेखा-जोखा।
  • राज्यों की सांस्कृतिक पहचान: भारत के हर राज्य को उसकी भौगोलिक और सांस्कृतिक आत्मा के अनुरूप अद्वितीय प्रतीकात्मक नाम (जैसे—धरती का स्वर्ग, दर्रों की भूमि) दिए गए हैं।

यह पुस्तक किसके लिए अनिवार्य है?

  1. प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी (UPSC/SSC): जटिल ऐतिहासिक घटनाओं और करंट अफेयर्स को प्रतीकों के माध्यम से याद रखने का एक शानदार 'मेमोरी टूल'।
  2. साहित्य और कविता प्रेमी: आधुनिक हिंदी कविता और 'प्रतीकवाद' (Symbolism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण, जो छंदों की शुद्धता (पिंगल शास्त्र) पर आधारित है।
  3. राजनीतिज्ञ एवं नीति-निर्माता: सत्ता के चक्रों और नेतृत्व की विरासतों को समझने के लिए एक दार्शनिक मार्गदर्शिका।
  4. जिज्ञासु नागरिक: हर वह व्यक्ति जो भारत के 'राष्ट्र-रथ' की यात्रा को बिना किसी वैचारिक पक्षपात के देखना चाहता है।

लेखक के बारे में

भारतीय वायु सेना के पूर्व वारंट ऑफिसर आनन्द कुमार आशोधिया (साहित्यिक नाम: आनन्द शाहपुर) द्वारा रचित यह कृति उनके 32 वर्षों के अनुशासित अनुभव और गहरी सांस्कृतिक पैठ का परिणाम है। 380 से अधिक रचनाओं के सृजक आनन्द जी ने इस महाकाव्य में पिंगल शास्त्र की मर्यादा और आधुनिक विमर्श का जो संगम किया है, वह विरल है।

इतिहास की यह यात्रा विवाद के लिए नहीं, बल्कि विमर्श के लिए है।

आज ही 'अथ मार्जरिका उवाच' को अपनी लाइब्रेरी का हिस्सा बनाएं और राष्ट्र की इस अमर यात्रा के साक्षी बनें!

प्रकाशक: अविकावनी पब्लिशर्स विधा: महाकाव्य / प्रतीकात्मक इतिहास ISBN: 978-93-5619-397-0

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