किस्सा भगत पूरणमल — हरयाणवी लोक रागनी संग्रह (समीक्षा सहित)
Kissa Bhagat Puranmal — Haryanvi Lok Ragni Sangrah (Samiksha Sahit) — लोकगाथा, पिंगल छंद-विधान एवं तटस्थ साहित्यिक समालोचना का संकलन

पुस्तक विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अंग्रेज़ी शीर्षक | Kissa Bhagat Puranmal — Haryanvi Ragni Collection (With Review) |
| लेखक | आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) |
| भाषा | हिन्दी / हरयाणवी |
| पृष्ठ संख्या | 254 |
| प्रकाशन वर्ष | 2025 |
| ISBN | 978-81-989952-8-5 |
| विधा | लोककाव्य (रागनी) · पिंगल छंदशास्त्र · संत-साहित्य · साहित्यिक समीक्षा |
| शैक्षणिक क्षेत्र | हरियाणवी लोक-साहित्य, संत-परंपरा, नाथ-पंथ, छंद-विधान, वाचिक परंपरा, तुलनात्मक लोक-साहित्य |
| प्रकाशक | एस. जैन पब्लिकेशन (SJain Publication) |
पुस्तक के बारे में
“किस्सा भगत पूरणमल – हरयाणवी लोक रागनी संग्रह (समीक्षा सहित)” हरियाणवी लोक-साहित्य के क्षेत्र में एक विशिष्ट एवं अभिनव प्रयोग है। यह ग्रंथ केवल एक गाथात्मक संकलन नहीं है, बल्कि शिल्प, भाव और वैचारिक चिंतन का एक समावेशी मंच है। लेखक आनन्द कुमार आशोधिया ने इसमें हरियाणा की मौखिक परंपरा को गंभीर लेखकीय चिंतन और पिंगल शास्त्र के अनुशासन से जोड़ने का कार्य किया है।
“यह ग्रंथ ‘योगी पूरणमल’ की उस यात्रा का सांस्कृतिक दस्तावेज है, जो रक्त और धर्म के द्वंद्व से निकलकर लोकाश्रय बन जाती है। माँ की कोख, राजा की गद्दी, गुरु की कृपा और सौतेली माँ के षड्यंत्र से निकलती यह कथा केवल एक योगी की नहीं, समाज की आत्मा की है।”
प्रमुख विशेषताएँ एवं नवाचार
- रचना और समीक्षा का संगम: प्रत्येक रचना दो रूपों में प्रस्तुत की गई है—एक सहज व भावपूर्ण लोक-काव्य के रूप में और दूसरा उसके साथ जुड़ी तटस्थ साहित्यिक समीक्षा व शिल्प-विश्लेषण के रूप में।
- पिंगल शास्त्र का सहज समन्वय: प्रत्येक किस्सा गीतात्मक तर्ज, यति-विराम, मात्रा-गणना और छंद-शुद्धता की कसौटी पर परखा गया है।
- संत-परंपरा और सांस्कृतिक दृष्टिबोध: पूरणमल के आख्यान के माध्यम से त्याग, नैतिक दृढ़ता, गुरु-कृपा और लोक-चेतना का दार्शनिक विश्लेषण।
- बहुआयामी उपयोगिता: यह कृति रागनी गायकों के लिए गेयता और छंद का मानक प्रस्तुत करती है, आलोचकों को नई समीक्षा-दृष्टि देती है, और शोधकर्ताओं के लिए लोक-संस्कृति व संत-परंपरा का प्रामाणिक संदर्भ प्रदान करती है।
उद्धरण कैसे दें
Ashodhiya, Anand Kumar. (2025). Kissa Bhagat Puranmal: Haryanvi Lok Ragni Sangrah (Samiksha Sahit). SJain Publication.

