अन्तर्मन की यात्रा: हिन्दी काव्य संग्रह (Hindi Edition) by Anand Kumar Ashodhiya (Author)
अन्तर्मन की यात्रा: राष्ट्र-चेतना, सामाजिक यथार्थ और लोक-संवेदना का अमर काव्य-नाद
"साहित्य केवल शब्दों का विलास नहीं, अपितु आत्मा का वह दर्पण है जिसमें कालखंड की धड़कनें, सामाजिक अंतर्द्वंद्व और मनुष्य की आंतरिक अनुभूतियाँ मूर्त रूप लेती हैं।"
‘अन्तर्मन की यात्रा’ स्वतंत्र शोधार्थी, लोक-संस्कृति संरक्षक और कवि आनन्द कुमार आशोधिया ('कवि आनन्द शाहपुर') का वह बहुप्रतीक्षित काव्य-संग्रह है, जो अंतस की मौन संवेदनाओं और बाह्य यथार्थ के जीवंत टकराव से उपजा है। यह कृति जीवन के विविध अनुभवों, सैन्य जीवन के कठोर अनुशासन, सीमाओं पर मातृभूमि के प्रति समर्पण तथा हरियाणा की समृद्ध वाचिक सांग व रागनी परंपरा का एक कालजयी समन्वय है।
पुस्तक के पाँच वैचारिक सोपान:
यह काव्य-संग्रह सुधी पाठकों को पाँच सुगठित वैचारिक पड़ावों से होकर ले जाता है:
राष्ट्र-वंदना (National Pride & Valor):
सैन्य जीवन के कड़े अनुशासन और दुर्गम सीमाओं के प्रत्यक्ष अनुभवों से सिंचित ओजस्वी कविताएँ। ‘परमवीर चक्र विजेता निर्मलजीत सिंह सेखों’ और ‘अग्निवीर’ जैसी रचनाओं के माध्यम से भारतीय सशस्त्र सेनाओं के अदम्य पराक्रम और शौर्य का जीवंत शंखनाद।
आत्म-बोध और दार्शनिक चिंतन (Philosophical Introspection):
‘वक़्त’ और ‘सवेरा’ जैसी रचनाओं में सांसारिक आपाधापी से परे मनुष्य के आंतरिक अस्तित्व, मौन, काल-चक्र और आत्म-साक्षात्कार का शांत, गंभीर प्रवाह।
मानवीय संवेदनाएँ (Human Empathy):
जीवन की कोमल अनुभूतियों, पारिवारिक आत्मीयता, वात्सल्य और संघर्षों के बीच आशा की लौ जलाती मर्मस्पर्शी रचनाएँ।
सामाजिक विसंगतियों पर सीधा प्रहार (Social Reality & Critique):
आधुनिक समाज के नैतिक क्षरण के विरुद्ध निर्भीक उद्घोष। ‘सड़क पे जन्मे बच्चे की पुकार’, ‘बचपन’, ‘दहेज’, ‘मंगली’ और ‘रील का मायाजाल’ जैसी कविताएँ कन्या भ्रूण-हत्या, मिलावटख़ोरी, अंधविश्वास और सोशल मीडिया के आभासी भँवर में लुप्त होती मर्यादाओं को बेनकाब करती हैं।
लोक-संस्कृति और पिंगल अनुशासन (Folk Heritage & Poetics):
हरियाणा की पावन माटी, सूर्य-कवि पं. लखमीचंद, कवि-शिरोमणि माँगेराम और पूज्य गुरुवर श्री पालेराम दहिया (हलालपुरिया) की परंपरा से अनुप्राणित काव्य-शिल्प। पिंगल शास्त्र के कड़े नियमों—लय, मात्रा, छंद और विशुद्ध तुकांत—की शास्त्रीय शुचिता।
यह पुस्तक क्यों पढ़ें?
शास्त्रीय अनुशासन और लोक-सुगंध: आज के दौर में जहाँ छंद-मुक्ति के नाम पर शिल्पगत अनुशासनहीनता बढ़ रही है, यह संग्रह पिंगल शास्त्र, छंद-शुचिता और लोक-काव्य की गरिमा को दृढ़ता से पुनर्स्थापित करता है।
सैनिक की कलम से ओजस्वी स्वर: सीमाओं की वास्तविक धूल और राष्ट्र-रक्षा के सच्चे जज़्बे से उपजी प्रामाणिक देशभक्ति।
सोए हुए विवेक को झकझोरने वाला साहित्य: यह कविताएँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध पाठकों की सामूहिक अंतरात्मा को जगाती हैं।
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अन्तर्मन की यात्रा: हिन्दी काव्य संग्रह (Hindi Edition)
Hindi Edition by Anand Kumar Ashodhiya (Author) Format: Kindle Edition


