HARYANVI RAGNI SCHOLARLY DIGITAL CORPUS (HRSDC): हरयाणवी रागनी की साहित्यिक विरासत का दस्तावेज
लेखक: Anand Kumar Ashodhiya
हरयाणवी भाषा, साहित्य और लोक-संस्कृति के दस्तावेजीकरण की दिशा में HARYANVI RAGNI SCHOLARLY DIGITAL CORPUS (HRSDC) एक शोध-उन्मुख प्रयास है। यह कृति हरयाणवी रागनी की मौखिक साहित्यिक परंपरा को उसके मूल भाषिक और सांस्कृतिक संदर्भ में संरक्षित करने तथा व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँचाने का प्रयास करती है।
रागनी: केवल लोक-मनोरंजन नहीं
हरयाणवी रागनी को प्रायः लोकगीत अथवा लोक-मनोरंजन की परंपरा से जोड़ा जाता है। किंतु रागनियों के विस्तृत अध्ययन से इनमें भाषा, काव्य-विधान, मुहावरेदार अभिव्यक्ति, लय, रूपक, दार्शनिक चिंतन, नैतिक प्रश्न, सामाजिक अनुभव और सांस्कृतिक स्मृति के अनेक स्तर दिखाई देते हैं।
इसी दृष्टि से HRSDC रागनी को साहित्यिक, भाषिक और सांस्कृतिक evidence के रूप में दस्तावेजीकृत करता है।
73 चयनित रागनियाँ
इस corpus में HRSDC–0001 से HRSDC–0073 तक 73 चयनित हरयाणवी रागनियाँ सम्मिलित हैं।
प्रत्येक रागनी में मूल हरयाणवी पाठ को केंद्र में रखते हुए उसके साथ literary English translation प्रस्तुत किया गया है। अनुवाद का उद्देश्य केवल शब्द-दर-शब्द अर्थ देना नहीं, बल्कि मूल रचना के अर्थ, भाव, बिंब, स्वर और साहित्यिक spirit को व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँचाना है।
जहाँ आवश्यक है, वहाँ scholarly commentary, Pingal एवं poetic observations, selected language notes और literary assessment भी दिए गए हैं।
परंपरा और समकालीनता
HRSDC की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक रचनाओं के साथ समकालीन काव्य-स्वरों को भी स्थान दिया गया है।
इससे रागनी परंपरा की निरंतरता के साथ-साथ उसके बदलते सामाजिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक संदर्भों को देखने का अवसर मिलता है।
मौखिक परंपरा में साहित्य केवल पुस्तकों में सुरक्षित नहीं रहता। वह स्मृति, प्रदर्शन, गायन, भाषा और पीढ़ी-दर-पीढ़ी transmission के माध्यम से भी आगे बढ़ता है। HRSDC इसी मौखिक literary continuity को दस्तावेजीकृत करने का प्रयास है।
हरयाणवी बोली से भाषा तक
HRSDC मेरे पिछले शोध-उन्मुख कार्यों की उसी श्रृंखला का विस्तार है जिसमें हरयाणवी की—
भाषिक संरचना,
व्याकरण,
शब्द-संपदा,
मुहावरे और लोकोक्तियाँ,
जैसे विभिन्न पक्षों पर कार्य किया गया है।
इस व्यापक यात्रा का उद्देश्य हरयाणवी को उसके भाषिक, साहित्यिक और ज्ञानात्मक स्वरूप में समझने तथा उसके प्रमाणिक दस्तावेज तैयार करने की दिशा में योगदान देना है।
हरयाणवी बोली से भाषा तक — एक निरंतर शोध एवं प्रकाशन-यात्रा।
पुस्तक कहाँ उपलब्ध है?
HRSDC — हरयाणवी रागनी को सुनने से पढ़ने, पढ़ने से समझने और समझने से दस्तावेजीकृत करने की एक साहित्यिक यात्रा।
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