Monday, November 10, 2025

मातृभुमि

 

मातृभुमि

मातृभुमि


कुर्बां होकर देश के ऊपर, जब शहीद लौटकर आते हैं 

बड़े बड़े सूरमाओं के भी, कलेजे मुँह को आते हैं

मेरी जननी ने शेर जना है, ना उसका दूध लजाउँगा 

ताल ठोंक कर रणभूमि में, दुश्मन को मज़ा चखाउँगा  


सबकी किस्मत में नहीं होता, देश पे फ़ना हो जाना 

जिस मिट्टी में पले बढ़े, उस मिट्टी में ही सो जाना 

चूम धरा को इस मिट्टी से, माथे पे तिलक लगाऊँगा 

भर हुँकार, दे ललकार, युद्ध में रणभेरी बजाऊँगा 

 

जब भी देश पुकारेगा, मैं हाज़िर हूँ भारत माँ की सेवा में 

देश से बढ़कर कुछ नहीं जीवन में, मैं तत्पर राष्ट सेवा में 

मातृभूमि की रक्षा हेतु ना पीछे कदम हटाऊँगा 

वीर सुशोभित होते रण में जग को ये बतलाऊंगा 


मैं लिपट तिरँगे में जब भी आऊँ, कोई आँसूँ ना बहाना 

मेरी शहादत व्यर्थ ना हो, बस माँ भारती के नारे लगाना 

मातृभुमि की रक्षा हेतू खून की होली में दुश्मन को नहलाऊँगा 

करके सुरक्षित मातृभुमि को फिर चिरनिंद्रा सो जाऊँगा   


रचनाकार : आनन्द कुमार आशोधिया©2024

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Tuesday, April 29, 2025

सवेरा

 

सवेरा

सवेरा

उठो उठो जागो सवेरा हो गया,
सूरज का रथ चमकता सुनहरा हो गया।
चिड़ियों की चहचहाहट है गीत सुनाती,
धरती ने ओढ़ी चादर सुनहरी मुस्काती।
नव किरणों का संगम है जीवन बनाए,
हर पल को आनंद से अब सजाए।
सपनों को सच करने का आया ये मौका,
हर राह पर मिलेंगी तुम्हें नई रोशनी का धोखा।
तुम आगे बढ़ो, ये सवेरा पुकारता,
नव ऊर्जा से हर दिल को संवारता।
उठो, जागो और गढ़ो नया इतिहास,
तुम्हारे हौसले से बदल जाएगा आकाश।
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जय परशुराम

जय परशुराम

 जय परशुराम

धरती पर वीर जब आए, पापों का अंत कराया। 

फरसा लेकर जो बढ़ चले, असुरों का नाश करवाया।

रेणुका मां के लाल बड़े, धरम का पाठ पढ़ाया। 

पिता के वचन निभा के जो, अधर्म का राज मिटाया।

सात बार पृथ्वी से, भारी राजा हटाए। 

धरम की ज्योति जलाकर जो, सत्य का मार्ग दिखाए।

दुष्टों से जब घिरे जमाना, वीरता का रूप दिखाया। 

परशुराम ने आकर धरती, अधर्म का अंत कराया।

राजा अर चक्रवर्ती तक, झुकाए शीश वहाँ। 

धरम अर ज्ञान के रक्षक जो, किए पापी का विधान।

धरम के दीप जलाए जो, अधर्म को दूर भगाए। 

सत्य अर शक्ति का संगम ले, जगत को राह दिखाए।

चलो उनके पद चिन्हों पे, सत्य का पाठ पढ़ाएँ। 

धरम की ज्योति जलाके हम, सबका जीवन सजाएँ।

यह वीरता की गाथा है, इसे सदा पूज्य बनाएँ। 

जय परशुराम का नाम ले, जगत में मान बढ़ाएँ।


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