Wednesday, January 28, 2015

गठबन्धन - नया हिन्दी गाना गीत कविता

गठबन्धन

गठबन्धन - नया  हिन्दी गाना गीत कविता

बगैर मेरी मर्ज़ी के एक इंच भर भी हिलो नहीं
चाहे जग रूठे या यारा, मेरे कहे से टलो नहीं
ग़र संभव नहीं ऐसा, तो तुम्हें समर्थन कैसा?
मैं समर्थन वापस लेता हूँ, वतन की बेहतरी के लिए

मेरे खिलाफ लगे आरोपों पर मिट्टी ढक दीजिये
लम्बित पड़े मुकदमों को ताक़ पर रख दीजिये
ग़र संभव नहीं ऐसा, तो तुम्हें समर्थन कैसा?
मैं समर्थन वापस लेता हूँ, क़ानून की बेहतरी के लिए

मेरी पार्टी के मंत्री को अमुक विभाग या फलां पद दीजिये
दूसरी पार्टी के मंत्री को घोषित विभाग तुरन्त रद्द कीजिये
ग़र संभव नहीं ऐसा, तो तुम्हें समर्थन कैसा?
मैं समर्थन वापस लेता हूँ, मन्त्रालय की बेहतरी के लिए

मेरे इलाक़े के लिए विशेष पैकेज घोषित कीजिये
भले ही सरे देश या अन्य प्रान्तों को शोषित कीजिये
ग़र संभव नहीं ऐसा, तो तुम्हें समर्थन कैसा?
मैं समर्थन वापस लेता हूँ, अपने इलाके की बेहतरी के लिए

अंधेर नगरी चौपट राजा फिर भी समर्थन दिया तुम्हे ताज़ा
अपनी गद्दी छोड़के राजा वैसा ही नाचो जैसा बजे बाजा
ग़र संभव नहीं ऐसा, तो तुम्हें समर्थन कैसा?
मैं समर्थन वापस लेता हूँ, गठबंधन सरकार के नैतिक मूल्यों की बेहतरी के लिए

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015
गठबन्धन - नया  हिन्दी गाना गीत कविता 

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माँ की अभिलाषा - नया हिन्दी गाना गीत कविता

माँ की अभिलाषा

माँ की अभिलाषा - नया हिन्दी गाना गीत कविता

भगवान तुम्हारे मंदिर में मैं एक ही विनती करती हूँ।
मेरी उम्मीद सरीखा पुत्र वर दो यही कामना करती हूँ।।

चाह नहीं कि मेरा पुत्र सुन्दर स्वस्थ बलवान हो,
ये भी मुझको चाह नहीं कि वो वीर शिवाजी समान हो,
मैं तो ये भी नहीं चाहती कि वो शिक्षक या विद्वान् हो,
और न ही किसी महफ़िल में उसकी कवियों जैसी शान हो,

सज्जनता की मूरत ना हो, भले आदमियों सी सूरत ना हो,
मातृभूमि का रक्षक ना हो, वीर लड़ाका युद्धरत्त ना हो,
सत्यता की मूरत ना हो, बात में उसकी सत्त ना हो,
किसी धर्म का अगुआ ना हो, उसके सम्मुख सत पथ ना हो,

तो फिर कैसा हो?

धूर्त लोभी लम्पट कपटी, दुर्जन सा हैवान हो,
काम क्रोधी जाहिल काहिल, गज भर की जुबान हो,
डाकू चोर लुटेरा ठग हो, सही मायनों में शैतान हो,
लूटपाट मारकाट उसके नाम की पहचान हो,

थाली का बैंगन हो, बेपैन्दी का लोटा हो,
झूठ का पुलिंदा हो, उसका हर कर्म खोटा हो,
राजनीतिक क़द ऊँचा हो, भले शरीर का छोटा हो,
आम आदमी को हरदम उसके दर्शनों का टोटा हो,

ताकि वो इन गुणों से सुसज्जित होकर राजनेता बन सके,
मक्कारी की चादर ओढ़े, जनता का चहेता बन सके,

क्योंकि आज के संसार में बाकी धंधे मंदे हैं,
जो राजनीति करने लगे, वो अक्लमन्द बन्दे हैं,
इनके सम्मुख नेत्रयुक्त भी आँखों से अन्धे हैं,
इनकी छवि साफ़ सुथरी, बाकि सब गंदे हैं,

भगवान तुम्हारे मंदिर में मैं एक ही विनती करती हूँ।
मेरी उम्मीद सरीखा पुत्र वर दो यही कामना करती हूँ।।

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015
माँ की अभिलाषा - नया हिन्दी गाना गीत कविता 
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खुदा खैर करे - नया हिन्दी गाना गीत कविता

खुदा खैर करे

खुदा खैर करे - नया हिन्दी गाना गीत कविता

खुदा खैर करे किसी का आशिक जुदा ना हो
जब चाहें पा लें, बशर्तें कि आशिक़ खुदा ना हो
जबसे बिछुड़े हैं तुमसे कोई ठिकाना ना मिला
ले लूँ शरण जहाँ पे, ऐसा आशियाना ना मिला
बदतर ए हालत में हैं, ना घर मिला न ठिकाना
एक उदास सी चट्टान से हो गया है याराना
भाई हम तो रोज उससे मिलते हैं
उसकी सुनते हैं तो अपनी कहते हैं
प्यार तो हम उसे सर ए आम करते हैं
सुबह से दोपहर और सर ए शाम करते हैं
लोग सोचते हैं कि हम उस पत्थर पर मरते हैं
लेकिन यकीं मानना जानेमन, प्यार तुम्हीं से करते हैं
लोगों का क्या है वो तो मुफ्त में बदनाम करते हैं
देखके मोहब्बत हमारी, ठंडी आहें भरते हैं
पत्थर तो पत्थर है, मोहब्बत तो तुम्हीं से करते हैं
पत्थर तो बस एक चट्टान है
हमारे बैठने भर का स्थान है
बैठके उसपे तेरी याद में खोए रहते हैं
जब यहाँ आओगे तो उस चट्टान से मिलवाएँगे
जहाँ बिताए मौसम तुझ बिन, वो स्थान भी दिखलाएँगे

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015

खुदा खैर करे - नया हिन्दी गाना गीत कविता
खुदा खैर करे - नया हिन्दी गाना गीत कविता

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