Monday, October 19, 2015

मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ - नया हिन्दी गाना गीत कविता

मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ

तुम लिखते रहो मैं पढ़ती रहूँ, सपनों की गागर भरती रहूँ 
तुम गाओ तराने प्यार के, मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ 

हर बार तमन्ना होती है कि, लगा पंख कहीं उड़ जाऊं 
तेरी बाहों के सशक्त घेरे में, कभी जलूं कभी बुझ जाऊं 
तेरी छाती पे सर रख के बस आँख मूँद तुझे सुनती रहूँ 
 तुम गाओ तराने प्यार के, मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ 

कभी रीती, कभी भरी भरी, कभी सुस्ती कभी अलसाऊं 
कभी धधकती, कभी सुलगती, कभी खुदी में जल जाऊँ 
तेरे ओज की इस ऊर्जा में, शनैः शनैः मैं भुनती रहूँ 
तुम गाओ तराने प्यार के, मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ 

तुम लिखते रहो मैं पढ़ती रहूँ , सपनों की गागर भरती रहूँ 
तुम गाओ तराने प्यार के, मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ 

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015-16
मैं ख्याल तुम्हारे बुनती रहूँ - नया  हिन्दी गाना गीत कविता

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Sunday, September 27, 2015

ना जाने क्यूँ - नया हिन्दी गाना गीत कविता

ना जाने क्यूँ

ना जाने क्यूँ - नया  हिन्दी गाना गीत कविता

इक छवि पलकों की कोर तक आके जा रही है
दूर खड़ी हो अधरों से खुद ही मुस्कराए जा रही है
प्यारी सी मनमोहक अदा लिए मन को रिझा रही है
ना जाने क्यूँ फिर भी पास आने से हिच किचा रही है

तुम बांधो तारीफों के पूल फिर हो के खुश भी क्या करना
जब तुम ही हासिल नहीं जग में तो ऐसे जहाँ का क्या करना
अब आके गले लगाले मौत फिर घुट घुट जी के क्या करना

नदी के मुहाने पे खड़ा सोचता हूँ की वो धारा कब आएगी
जब लाएगी चैन ओ सुकून और ज़िन्दगी महकाएगी

खुदा करे वो दिन जरूर आये और मेरे इस सपने को साकार कर जाए
या तो नदी ही किनारे से दो चार हो जाए या खुद किनारा ही नदी में समा जाए

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015-16
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पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती - नया हिन्दी गाना गीत कविता

पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती

पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती - नया  हिन्दी गाना गीत कविता

पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती
आँखों की शर्म मुझे रोने नहीं देती।
पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती।।

किस से गम छुपाऊँ और किस को घाव दिखाऊं
इस पेट काटती भूख को कैसे मैं बहलाऊँ

समझ नही आता मुझे क्यों दो जून की रोटी मयस्सर नहीं होती
सुलगती भूख की मुलाक़ात रोटी के टुकड़े से अक्सर नहीं होती

इंसानियत बेचकर खा गया इंसान, हम मज़लूमों पर उनकी निगाह अक्सर नहीं होती
बेसहारा निराश्रित भूख से बिलबिलाते चेहरों पे, दर्द की शिकन रह गुज़र नहीं होती

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015-16
पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती - नया  हिन्दी गाना गीत कविता



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