Tuesday, November 11, 2025

भारत के परमवीर चक्र विजेता-निर्मलजीत सिंह सेखों

 

भारत के परमवीर चक्र विजेता-निर्मलजीत सिंह सेखों

भारत के परमवीर चक्र विजेता की, मनै पड़गी बात बताणी 
निर्मलजीत सिंह सेखों जट की, आज सुणल्यो अमर कहाणी

पंजाब प्रांत के, लुधियाणा जिले में, रुड़का नाम एक, गाम हुआ 
सतरह जुलाई, सन तैंतालीस, जब सूरज देव का, एहतराम हुआ 
त्रिलोचन घर, बच्चा जन्मा, जिसका निर्मलजीत सिंह, नाम हुआ
त्रिलोचन सिंह, वायु सेना का, एक नामी गिरामी, अफसर था 
पिता की देखम, देख निर्मल भी, सेना में जाणे को, तत्पर था 
सन सड़सत की, चार जून को, वो आया सुनहरी, अवसर था 
वायु सेना में, ले कै कमीशन, गया सीख जहाज उडाणी 

निर्मलजीत सिंह सेखों जट की, आज सुणल्यो अमर कहाणी

ट्रैनिंग ले कै, श्रीनगर के एयर बेस में, निर्मल की हुई, तैनाती 
वायु सेना के, नेट जहाजों से, रोजाना सोरटी, भरी जाती 
पायलट से, फ्लाइंग अफसर बणग्या, खुश होगे सारे, सँगी साथी 
परमोशन सँग, जिम्मेदारी भी, साथ साथ बढ़, जाती है
एयरबेस की, रक्षा करने की, ड्यूटी सिर चढ़, जाती है 
बर्फीला, ठण्डा मौसम, पहाड़ी भी आगै अड़, जाती है 
जयहिंद करकै, सदा ड्यूटी चढ़ता, ना छोडी मूँछ, पिनाणी 

निर्मलजीत सिंह सेखों जट की, आज सुणल्यो अमर कहाणी

सन इकहत्तर, चौदह दिसम्बर, पकिस्तान नै, करी हिमाकत 
श्रीनगर एयरबेस पै, हमला करण में, झोंक देइ, पूरी ताकत 
एयर रेड का, हूटर बजग्या, यो दुश्मन नै गेर, देइ आफत 
द फ्लाइंग बुल्लेट, अठारहा स्क्वाड्रन, रेड़ी अपणी, बारी में
निर्मलजीत सिंह, भी था ड्यूटी पै, तैयार तत्परता, पारी में 
पल भर की भी, देर करी ना, काउंटर अटैक की, त्यारी में 
भाजकै चढ़ग्या, नेट जहाज में, उकी चालू करी, कमाणी  

निर्मलजीत सिंह सेखों जट की, आज सुणल्यो अमर कहाणी 

एयरफील्ड में, सुबह आठ बजे सी, धुंध हो रही थी, भारी
ठन्डे और, बर्फीले मौसम में, दिखण की हो रही, दुश्वारी 
फ्लाइट लेफ्टिनेंट, घुम्मनऔर निर्मल नै, ठा ली थी, जिम्मेदारी 
आठ बजकै, चार मिनट पै, करया उड़ने का, सिग्नल जारी 
दस सेकण्ड जब, जवाब मिल्या ना, चालू करदी, उड़न सवारी 
पहले घुम्मन, फिर निर्मलजीत सिंह, दोनों भरगे, गगन उडारी 
फेर दुश्मन नै एक बम दे मारा, हुई चौगिरदे धुम्मा धाणी 

निर्मलजीत सिंह सेखों जट की, आज सुणल्यो अमर कहाणी

दुश्मन के बम नै, एयरफील्ड पै, अफरातफरी, खूब मचाई 
गगनमंडल, भरग्या धुम्मे तै, ना दे था कुछ भी, सही दिखाई 
पाकिस्तान के, छह सेबर जेट, निर्मलजीत नै, दिए दिखाई  
एक सेबर जेट, लिया निशाने पै, पल भर की ना, देर लगाईं 
तेज गति से, मारा निशाना ,सेबर जेट कर दिया, धाराशायी 
फेर दूजे सेबर, जेट को घेरकै, उके पिछवाड़े में, आग लगाईं 
कमाण्डर सचेत, करता रहग्या, अनसुणी करदी उसकी बाणी
  
निर्मलजीत सिंह सेखों जट की, आज सुणल्यो अमर कहाणी

निर्मलजीत की, आवाज सुनाई पड़ी, मैं दुश्मन नै ना, आवण दूँगा 
दो सेबर जेट, जहाजों के पीछे हूँ, अब उनको भी ना, जावण दूँगा
जब तक मेरी, जां में जां है, ना हाथ धरा कै किसे नै, लावण दूँगा 
बोला मेरा जेट भी, निशाने पै आग्या, इब तूं सम्भाळ, घुम्मन भाई 
निर्मलजीत कै गोळी लग गई, इसके बाद कोए, आवाज ना आई 
फ्लाइट कमाण्डर भी, कहता रहग्या, चौकसी बरतणा, मेरे भाई 
दो सेबर जेट का, हाल देखकै, बाकि चार नै पड़गी, दुम दबाणी 

निर्मलजीत सिंह सेखों जट की, आज सुणल्यो अमर कहाणी 

फ्लाइंग अफसर, निर्मलजीत सिंह, देश के ऊपर, ढेर होग्या 
एक अकेला, छह जेट दुश्मन के, दुश्मन स्याहमी, शेर होग्या 
पाकिस्तान की, आँधी आगै, एकला छाती ताण, सुमेर होग्या
जहाज का मलबा, एक घाटी में, कई मील दूर पै, पाया था 
खोज करी थी, सेना नै पर, निर्मल का शव नहीं, पाया था 
सेना जाँच पूर्ण होणे पै, वीर को शहीद घोषित, करवाया था 
सारा युद्ध दिया पलट ऐकले नै, पाक नै पड़गी मुँह की खाणी 

निर्मलजीत सिंह सेखों जट की, आज सुणल्यो अमर कहाणी

अठाइस साल के, रणबाँकुरे नै, दुश्मन के दाँत, कर दिए खट्टे
पाकिस्तान के, सेबर जेट नष्ट कर, रणभूमि में, कर दिए इकट्ठे  
दो मार गिराए, चार वापिस भगाए, दुश्मन गैल्यां, कर दिए ठट्ठे
मरणोपरान्त, निर्मलजीत सिंह को, परमवीर चक्र से, गया नवाजा
शहीद के सम्मान में, कहीं बुत लगा तो, कहीं भवन और, दरवाजा 
“आनन्द शाहपुर”, न्यू कहता वीर नै, एकबै फेर जन्म, लेकै आजा 
शहीदों की बरसी पर, हर साल लगैंगे मेळे, ना होगी बात पुराणी 

भारत के परमवीर चक्र विजेता की, मनै पड़गी बात बताणी
निर्मलजीत सिंह सेखों जट की, आज सुणल्यो अमर कहाणी


जयहिंद जयहिंद जयहिंद जयहिंद जयहिंद

कॉपीराइट : आनन्द कुमार आशोधिया।

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आबू गौरव गाथा

 

आबू गौरव गाथा


अर्बुदा की भव्य गोदी में, बैठा है आबू पर्वत

इस गिरि पर इतिहास ने जाने ली हैं कितनी करवट

देलवाड़ा के जैन मंदिर, आबू की शान बढ़ाते

वास्तुशिल्प श्लाघा करते, जन जन नहीं अघाते

एक सिद्ध ने अपने नक्ख से खोद के, नक्खी झील बनाई

स्नान ध्यान कर कार्तिक पूर्णिमा को, करते लोग बड़ाई

मनोहारी छटा, भव्य दृश्य, नक्खी के मस्त नज़ारे

कहीं पे चलती छोटी कश्ती, कहीं पे बड़े शिकारे

अर्बुदा का मंदिर ही तो, अधर देवी कहलाता

जिसके दर्शन हेतु हर जन, झुकके अंदर जाता

साढ़े सात सौ सीढ़ी नीचे, होते गोमुख दर्शन

ऋषि मुनियों की तपोभूमि पे, निर्मल होता तनमन

ईश्वरीय अध्यात्म हेतु, ब्रह्म कुमारी विश्वविद्यालय

हिन्दू, जैनी और बोद्धों के, जाने कितने देवालय

अरावली और हिमालय के मध्य, सबसे ऊँचा और प्रखर

पाँच हज़ार एक सौ पचास फुट पर तना खड़ा है गुरु शिखर

यहाँ पे वायु सेना स्टेशन, सक्रिय रायफल राजपुताना

आंतरिक सुरक्षा अकादमी और के रि पु बल भी है जाना माना

भारत माँ के सजग प्रहरी रक्षा करते आबू की आन की

जो देखे दुश्मन टेढ़ी नज़र से, तो ये बाज़ी लगादें जान की

"जय हिन्द जय आबू का, मिलकर लगाएँ नारा

इस आबू की शान बढ़ाना, ये ही धर्म हमारा

रचयिता

रचयिता : आनन्द कुमार आशोधिया कॉपीराइट 1996-2025

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Monday, November 10, 2025

विजय दिवस (भारत की विजय - बंगला देश का उदय)

 

"विजय दिवस" (भारत की विजय - बंगला देश का उदय) 


साल 71 के शुरूआती महीनों में, युद्ध के दिखने लगे आसार 

याहया खान ने पूर्व पाक में, शेख मुजीब को किया गिरफ्तार 

पूर्व पाक में उठ रहे विद्रोह को, कुचल रही थी पाक सरकार 

पाक सैनिकों ने ज़ुल्मो सितम कर, पूर्व पाक में किया अनाचार 

यहाँ की बातें यहाँ पर छोडो, अब आगे का करूँ विस्तार 


प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को, अखर रहा था पाक दुरव्यवहार 

मानेकशॉ से किया राय मशविरा, और जाना सेना का विचार 

क्या हम अप्रैल माह के अंदर, पाक पर कर सकते हैं वार 

मानसून के चलते जनरल ने, बगैर दबाव के किया इंकार 

यहाँ की बातें यहाँ पर छोडो, अब आगे का करूँ विस्तार 


सन इकहत्तर तीन दिसम्बर, लगा पकिस्तान गया भरमाय 

निर्बुद्धि ने हिन्दुस्तान पर, हमले का दिया बिगुल बजाय 

पश्चिम भारत के हवाई अड्डों पर, पाकिस्तान ने दिए बम गिराय 

इंदिरा जी ने मंत्रीमण्डल की, आपात बैठक ली तुरन्त बुलाय  

यहाँ की बातें यहाँ पर छोडो, अब आगे का देउँ जिक्र सुनाय 


पहले हमला करके पाक ने, अपनी शामत लेइ बुलाय 

भारत ने भी पूर्व पाक में, चटगांव कब्ज़ा लिया छुडवाय  

जेसोर, खुलना जीत लिये फिर, ढाका पर देइ नज़र जमाय 

मिग इक्कीस बमवर्षक फाइटर, युद्ध के लिए दिए सजाय 

यहाँ की बातें यहाँ पर छोडो, अब आगे का देउँ जिक्र सुनाय 


ढाका गवर्नमेंट हाउस उपर, चौदह तारीख को दिए बम बरसाय  

भारतीय बमवर्षक मिग ने, बिल्डिंग की  छत देई उड़ाय 

ढाका गवर्नर मलिक के हाथों, इस्तीफा भी लिया लिखवाय

काँपते हाथों मलिक साहब ने, खुद के दस्तखत दिए बनाय  

यहाँ की बातें यहाँ पर छोडो, अब आगे का देउँ जिक्र सुनाय 


भारत का हमला ना सहकर, जनरल नियाजी गए घबराय 

16 दिसंबर ऐतिहासिक दिन, नियाजी सरेंडर दिए कराय 

तिरानवे हजार पाक सैनिकों को, युद्ध में बंदी लिया बनाय 

पूर्व पाक को आज़ाद कराकर, नया बांग्लादेश दिया बनवाय 

यहाँ की बातें यहाँ पर छोडो अब आगे का देउँ जिक्र सुनाय 


उनतालीस सौ रण बाँकुरों ने, भारत माँ पे दिया शीश चढ़ाय 

इन शहीदों की याद में आज हम, विजय दिवस हैं रहे मनाय 

आओ मिलकर नमन करें हम, विजय दिवस के वीरों को 

मौका मिला तो हिन्द की खातिर, हम चूमेंगें शमशीरों को 

मौका मिला तो हिन्द की खातिर, हम चूमेंगें शमशीरों को 


जयहिन्द 

जयभारत 

आनन्द कुमार आशोधिया कॉपीराइट 2024

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