Friday, August 5, 2022

पोता

पोता

पोता


जब से खबर पता चली कि पुत्रवधु "पेट" से है,
परिवार जन, परिचित, बन्धु सब ख़ुशी से हरषाने लगे
पहलौठी का है, देख लियो पोता ही होगा
रोज रोज सब यही गीत गाने लगे
हम भी सबकी देखम देख, जब भी बहू पैर छूती
तो आशीर्वाद के रूप में "पुत्रवती भवः" अलापने लगे
मातृ शिशु रक्षा हेतु सरकारी संरक्षण प्राप्त योजना के तहत
हर महीने बहू के स्वास्थ्य की जांच दिनों दिन कराने लगे
माता और शिशु हृष्ट पुष्ट रहें, इसी ख्याल से
बहू की लिलौनी कर करके, उसे पौष्टिक आहार खिलाने लगे
डॉक्टर की सलाह से निर्धारित अवधि और मात्रा में
मल्टी विटामिन, मिनरल और न्यूट्रिशन खिलाने लगे
बहू का बढ़ता वजन और चेहरे की चमक देखकर
पोता होगा, पोता होगा, सब ऐसा अनुमान लगाने लगे
तीन से छह और छह से नौ महीने का अंतराल घटकर
बहुप्रतीक्षित दिन, घंटे, मिनट और सेकंड गिनवाने लगे
आखिर वो घड़ी भी आ गई, डिलीवरी के दिन
सब पोते की चाह में हस्पताल के इर्द गिर्द मंडराने लगे
सबकी आशाओं को धता बताकर, कन्या ने जन्म लिया
आशाओं पर तुषारापात हुआ तो सब मुँह बनाने लगे
मेरी धर्मपत्नी खुश कि दादी बन गई, पुत्र खुश कि पिता बन गया,
हम सबसे खुश कि इस कन्यारत्न के आने से हम दादा कहलाने लगे
जच्चा बच्चा को देखने वार्ड में गया तो पुत्रवधू ने शिकायत की
पापा आप तो रोज आशीर्वाद में कहते थे कि "पुत्रवती भवः"
अब पोती देख कर भी इतराने लगे
मैंने हँस कर कहा, मैं तो फिर कह रहा हूँ कि
हे जगत जननी! पोता दे! ये सुनकर सब खिलखिलाकर हँसने लगे

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2022

स्वरचित, मौलिक, अप्रकाशित रचना
आनन्द कुमार आशोधिया (आनन्द कवि आनन्द)
रिटायर्ड वारण्ट अफसर, वायुसेना
शाहपुर तुर्क, सोनीपत, हरियाणा
पिन 131001
मोबाइल नंबर : 9963493474
Read More »

पोती

पोती

पोती


लेखक, गायक, कवि, कवियत्री, पोती की महिमा गाते हैं।
दिल पर रखके हाथ बताना, क्या सच में पोती चाहते हैं।।

कलमवीर बन कागज पर सब, पोती पे सुखद कविता लिखते हैं।
वास्तव में पोती आगमन पर, बड़े बड़ों के चेहरे बुझते हैं।
भावहीन शब्दों के आडम्बर से, पोती महिमा रचते हैं।
सच मानो वारिस की चाह में, इनके दिल मे पोते बसते हैं।।
हम चौथे स्तंभ के रूप में, समाज को आइना दिखाएंगे।
कन्या भ्रूण हत्या जैसी मानसिकता को समाज से दूर हटाएँगे।।
समाज में सन्नाटा है, कन्याओं का घाटा है, देखो लिंगानुपात।
लड़के और लड़की में ये भेदभाव है जाना माना सर्वव्याप्त।।
पोते सबको प्यारे हैं, सबकी आँख के दुलारे हैं।
पोती मज़बूरी है, सब पोते को ही चाह रहे हैं।।

सबको चाहिए पोते वारिस, इसलिए पोतों की होती बारिश।
पोते की चाह में लिंग जांच के लिए डॉक्टर से करें सिफारिश।।
कन्या एक आँख भाती नहीं, माँ भी कन्या को ज़नाति नहीं।
लिंग जांच में कन्या आए तो गर्भपात कराने से शर्माती नहीँ।।
कन्याओं का सूखा पड़ग्या, हरियाणे का रुक्का पड़ग्या।
कंवारो की फौज हो गई, अब सबका नक्शा झड़ग्या।।
लड़की कम, लड़के ज्यादा, लो अब कर लो वारिस पैदा।
लिंगानुपात बिगड़ गया, भला किसका हुआ इसमें फायदा।।

कन्या भ्रूण हत्या यहाँ, रोज रोज होती है।
मरी हुई इंसानियत भी, गफलत में पड़ी सोती है।।
लड़कियों की कमी के चलते, दुल्हन खरीदते हैं।
कोख में ही मार कन्या, अपन ज़मीर बेचते हैं।।
लड़के ऊँचे, लड़की नीची, दोयम दर्ज़ा देते हैं।
लड़कियों को लड़कों से, नीचा ही समझते हैं।।

अब भी समय है, समझ जाओ, जाग जाओ।
घर में लड़कियों को, बराबरी का दर्ज़ा दिलाओ।।
माँ, बहिन, बेटी बहू को, इज़्ज़त बख्शा करो।
कन्या भ्रूण हत्या रोको, कन्या की रक्षा करो।।
फिर देखना हरियाणे में कैसी खुशियां छायेंगी।
मै हरियाणे की बेटी हूँ, पोती गर्व से दोहराएंगी।।

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2022

स्वरचित, मौलिक, अप्रकाशित रचना
आनन्द कुमार आशोधिया (आनन्द कवि आनन्द)
रिटायर्ड वारण्ट अफसर, वायुसेना
शाहपुर तुर्क, सोनीपत, हरियाणा
पिन 131001
मोबाइल नंबर : 9963493474
Read More »

अग्निवीर ही अग्निपथ पर अपनी राह चुनेंगे

अग्निवीर ही अग्निपथ पर अपनी राह चुनेंगे

अग्निवीर ही अग्निपथ पर अपनी राह चुनेंगे


देश सेवा का अवसर है ये, सेना कोई रोजगार नहीं।
करो स्वेच्छा से वतनपरस्ती, सेना कोई बेगार नहीं।।

जड़ बुद्धि, चेतन शून्य, राष्ट्र विरोध में संलिप्त हैं।
स्वार्थ में अतिरेक तत्त्व, देश प्रेम से रिक्त हैं।।

भर्मित, कुंठित, दिशाहीन, क्या ख़ाक देश चलाएँगे?
ये तो वो परजीवी हैं, जो देश फूँक छुप जाएँगे।।

संस्कारी अनुशासित युवा ही, नव आयाम भरेंगे।
उपद्रवी तो वतन जलाकर, घर पर आराम करेँगे।।

देशप्रेम के ज़ज़्बे से जो, ओतप्रोत होँगे युवा।
भारत भू की रक्षा के, जिम्मेदार होँगे वो युवा।।

अग्निवीर ही अग्निपथ पर, अपनी राह चुनेंगे।
भारत माँ की रक्षा हेतु, रण में यलगार करेंगे।।

सेना में भर्ती होने का, ये मौका बड़ा सुनहरा है।
जा कर समर्पित जान देश पर, ये सौदा खरा खरा है।।

आकर्षक वेतन पाने वालों से तो, यह संसार भरा है।
तन न्यौछावर कर भारत माँ पे, वीरों ने शीश काट धरा है।।

है हिम्मत, तो आओ पर करें, सेना तो आग का दरिया है।
तुम क्या समझे सेना को, क्या ये रोज़गार का जरिया है।।

ये नौकरी नहीं, भारतीय सेना तो ज्वालामुखी का मुहाना है।
अग्निपथ वो चुनें, जिन अग्निवीरों को इस तपिश में नहाना है।।

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2022

स्वरचित, मौलिक, अप्रकाशित रचना
आनन्द कुमार आशोधिया (आनन्द कवि आनन्द)
रिटायर्ड वारण्ट अफसर, वायुसेना
शाहपुर तुर्क, सोनीपत, हरियाणा
पिन 131001
मोबाइल नंबर : 9963493474


Read More »