Monday, August 1, 2022

दिव्यालय पटल पर फौजी जवानों के साथ मना कारगिल विजय दिवस सम्मान समारोह

दिव्यालय पटल पर फौजी जवानों के साथ मना कारगिल विजय दिवस सम्मान समारोह


दिव्यालय पटल पर फौजी जवानों के साथ मना कारगिल विजय दिवस सम्मान समारोह

दिव्यालय साहित्यिक पटल पर मंगलवार दिनाॅंक २६/७/२२ को कारगिल विजय दिवस पर देश के पराक्रमी अपराजितों के गौरव विजय सम्मान में "एक शाम अजेयों के नाम" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की संचालिका मंजिरी निधि के संचालन में मुख्य अतिथि कर्नल दीपक रामपाल द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया।

दिव्यालय की संस्थापिका व्यंजना आनंद मिथ्या द्वारा कारगिल शहीदों को नमन करते हुए कारगिल की शौर्य गाथा इतिहास रचने वाले विजयी सिपाहियों का हार्दिक अभिनंदन किया गया। अंतिमा निर्मल द्वारा देशभक्ति गीत की प्रस्तुति के साथ ही मनीषा अग्रवाल के द्वारा सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी गई।

कार्यक्रम में भारत माॅं के वीर सिपाही होशियार सिंह जी को आमंत्रित किया गया। 

आनंद कुमार आशोदिया ने आमंत्रण पर देशभक्ति पर अपने वक्तव्य एवं वीर रस रचित आल्हाउदल गीत की प्रस्तुति दी।

कमांडर हेमंत चौरे की पत्नी उमा चौरे ने सैनिकों और उनके परिजनों के जीवन में साहस और संघर्षों का जिक्र किया। पटल के प्रमुख महेश जैन ज्योति ने सम्मान करते हुए सैनिकों को जान हथेली पर लेकर चलने वाला बताया। 
कारगिल युद्ध की प्रत्यक्ष गवाह रही डा.प्राची गर्ग ने स्वयं को देश की सेवा में समर्पित होने पर स्वयं गौरवान्वित होना बताया। बोफोर्स और चालीस रॉकेट का युद्ध ट्रायल बैटल फील्ड में देखने वाली डा.प्राची गर्ग ने युद्ध के दौरान जख्मी होने वाले सैनिकों की चिकित्सा में अपना योगदान होना बताया। 

राष्ट्रपति अवार्ड वीर चक्र से सम्मानित कर्नल दीपक रामपाल जी ने संपूर्ण कारगिल युद्ध के अथक संघर्षों में शहीदों की शहादत के साथ पाक सेना से लड़कर भारतीय सेना की कारगिल विजय गाथा कही। कर्नल रामपाल के साथ नेवल चीफ कमांडर राकेश पांडा, दंतेवाड़ा नक्सलवाद से रक्षा करने वाले सीआर पी एफ के प्रमुख नेतृत्वकर्ता अमित मिश्रा एवं मेकेनिकल इंजीनियरिंग आशुतोष ने देश की भक्ति में अपने योगदान का वर्णन किया। 

कर्नल प्रवीण त्रिपाठी द्वारा उद्बोधन में घाटी में आतंकवाद को खत्म करने के लिए की गई लड़ाई में अपने प्रयासों को बताया। कर्नल त्रिपाठी द्वारा मन में धधक उठी ज्वाला राष्ट्र प्रेम दर्शाते हुए सुंदर गीत गाया। दिव्यालय पटल 

संचालिका व्यंजना आनंद मिथ्या द्वारा कार्यक्रम में शामिल कारगिल युद्ध के विजयी वीर योद्धाओं को सम्मान स्वरूप दिव्यालय की ओर से प्रशस्ति पत्र और शील्ड दिये गये जो उनके घर तक पहुंचाएं जाएंगे ।व्यंजना जी ने कारगिल विजयी योद्धाओं की पटल पर उपस्थिति का आभार मानते हुए इसे पटल का सौभाग्य माना। 

कर्नल प्रवीण शंकर त्रिपाठी ने उद्बोधन में दिव्यालय पर आए अतिथियों एवं पूरे दिव्यालय पटल का आतिथ्य हेतु हार्दिक आभार माना। 

अंत में दिव्यालय प्रमुख अध्यक्ष राजकुमार छापड़िया जी द्वारा वीर रस से ओतप्रोत गीत की प्रस्तुति देते हुए आए हुए अतिथियों का आभार प्रदर्शन किया गया। राजकुमार छापड़िया जी ने संस्थापिका व्यंजना आनंद मिथ्या, संचालिका मंजिरी निधि, गीत गायिका अंतिमा निर्मल, नृत्यांगना मनीषा अग्रवाल , सचिव नरेंद्र वैष्णव सक्ती,पटल गुरु गजेन्द्र हरिहारनो दीप,अलंकरण प्रमुख राजश्री शर्मा, मीडिया प्रभारी पूर्णिमा मलतारे, दैनिक अलंकरण अनिता शुक्ला एवं उपस्थित दिव्यालय पटल के सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त कर अंत में राष्ट्रगान जन गण मन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

दिव्यालय पटल
मीडिया प्रभारी_
पूर्णिमा मलतारे
२६/७/२२

स्त्रोत : दिव्यालय साहित्यिक पटल
साभार : दिव्यालय साहित्यिक पटल
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Saturday, July 30, 2022

हर घर तिरंगा - आज़ादी का अमृत महोत्सव

हर घर तिरंगा - आज़ादी का अमृत महोत्सव 

मिशन तिरंगा हर घर फहरे, अपने घर पे फहराना
विश्वविजयी तिरंगा प्यारा, हर घर पर तुम लहराना

शिक्षा के व्यापारी बनकर, गर लूट रहे हो जनता को
शोषित कर अभिभावक छात्र, लूट रहे हो जनता को
जो तूँ हो शिक्षा का व्यापारी, तो तिरंगा मत फहराना

खाकी पहन कर अन्यायी का, जो तुमने साथ निभाया हो
गरीब आदमी से रिश्वत लेकर, जो तुमने माल कमाया हो
जो तूँ हो कानून का भक्षक, तो तिरंगा मत फहराना

पृथ्वी पर भगवान समान बन, जो तुमने धन कमाया है
लोगों का विश्वास लूटकर, आडम्बर तूने रचाया है
ऐसे ढोंगी पाखंडी बाबा, तुम तिरंगा मत फहराना

श्वेत वस्त्र धारी चिकित्सक, काले कारनामे करते हो
इलाज में बेईमानी कर तुम, अपनी जेबें भरते हो
जीवन रक्षक हो व्याभिचारी, तो तिरंगा मत फहराना

गीता की शपथ दिलाकर, लोगों से झूठ कहाते हो
झूठे मुकदमे तारीख कह के, काला धन कमाते हो
काले कोट में जो हो अन्यायी, तो तिरंगा मत फहराना

मिलावट और जमाखोरी कर, अनैतिक धंधा करते हो
खान पान में विष घोल कर, धन जोड़ जोड़ कर धरते हो
मिलावटखोर बेईमान व्यापारी, तो तिरंगा मत फहराना

तेरी कथनी और करनी में अन्तर, जन सेवक कहलाते हो
हर पांच साल में वादा करके, जनता को बरगलाते हो
बगुला भगत जनता का नेता, तो तिरंगा मत फहराना

लेकर शपथ संविधान की, विधि विधान भुला दिया
खा खा रिश्वत कमरे भर लिए, प्रशासन को सुला दिया
गर लेकर शपथ भूल गया हो, तो तिरंगा मत फहराना

कन्या भ्रूण हत्या जैसे, जघन्य अपराधों में लिप्त हो
दहेज लोभी, असामाजिक तत्व, मानवता से रिक्त हो
दहेज लोलुप भृष्टाचारी, तो तिरंगा मत फहराना

मेहनतकश मजदूरों का, जो तुम शोषण करते हो
राष्ट्र की सम्पत्ति हड़प कर, टैक्स की चोरी करते हो
हृदयहीन पाषाण उद्यमी, तो तिरंगा मत फहराना

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2022

हर घर तिरंगा - आज़ादी का अमृत महोत्सव

स्वरचित, मौलिक, अप्रकाशित रचना
आनन्द कुमार आशोधिया (आनन्द कवि आनन्द)
रिटायर्ड वारण्ट अफसर, वायुसेना
शाहपुर तुर्क, सोनीपत, हरियाणा
पिन 131001
मोबाइल नंबर : 9963493474

हर घर तिरंगा - आज़ादी का अमृत महोत्सव


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शहीद-ए-आज़म सरदार उधम सिंह

शहीद-ए-आज़म सरदार उधम सिंह

शहीद-ए-आज़म सरदार उधम सिंह


सुनाम शहर पिलबाद गाँव में, हिन्दू कम्बोज परिवार हुआ
नारायण कौर जननी की कोख से, पुत्र रत्न अवतार हुआ

अठारह सौ निन्यानवे साल था, महीना था दिसंबर का
तारीख छब्बीस, रात ठिठुरती, जन्मा शेर बब्बर था
पहला बेटा साधू सिंह था, इसका शेरसिंह नाम धरा
तेहाल पिता ने करी मजूरी, इन बच्चों का पेट भरा
नामकरण हुआ साधू सिंह का, मुक्ता सिंह कहलाया
बचपन से आक्रामक शेरसिंह, ऊधम सिंह कहलाया
बाल अवस्था माँ बाप गुजर गए, हो गए दोनों अनाथ
अनाथालय में पलते पलते, बड़ा भाई गया छोड़ साथ

ब्रिटिश फ़ौज में भर्ती हो गया, पहुँचा बसरा बग़दाद
एक साल में दी छोड़ नौकरी, वापस आ गया पिलबाद
जलियाँवाला काण्ड देख कर, मन में आग लगी थी
भगत सिंह का साथी बनके, देशभक्ति की लौ जगी थी
गदर पार्टी में सम्मिलित होके, बन गया क्रांतिकारी
बिन लाइसेंस हथियार जमा लिए, पकड़ा गया खिलाड़ी
पांच साल की सजा काट के, जा पहुंचा कश्मीर
जर्मनी होता लन्दन पहुंचा, आजमाने तकदीर

सीने में रही आग धधकती, बीते इक्कीस साल
कब मारुं जनरल डॉयर को, हरदम रहता यही मलाल
तेरह मार्च उन्नीस सौ चालीस, कैक्स्टन हॉल पधारा
बाँध निशाना दो गोली मारी, जनरल डॉयर मारा
मौके पर गिरफ्तारी दे दी, ना रन्च मात्र भी ख़ौफ़ हुआ
देश के ऊपर मर जाऊँगा, ये कहके बेख़ौफ़ हुआ
कृष्णा मेनन ने लड़ा मुकदमा, ब्रिटिश जज वकील
फाँसी का दिया हुक्म सुना, ना लाई पल की ढील

इकत्तीस जुलाई उन्नीस सौ चालीस, वो फांसी ऊपर झूला दिया
भारत माँ पे जान झोंक दी, अंग्रेजी शासन हिला दिया
देश विदेश में उधम सिंह की, शहादत का चर्चा ख़ास हुआ
"राम मोहम्मद सिंह आज़ाद" कहलाया, भारत माँ का दास हुआ
उधम सिंह की अस्थि बाबत, अंग्रेजों पर बना दबाव
चौंतीस साल के प्रयासों से, अस्थि पहुंची पिलबाद गाँव
ऐसे महान सेनानी को, भारत का जन जन शीश झुकाए
इस आज़ादी के मतवाले की, आओ बरसी आज मनाएं

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2022

शहीद-ए-आज़म सरदार उधम सिंह


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