Sunday, September 27, 2015

पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती - नया हिन्दी गाना गीत कविता

पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती

पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती - नया  हिन्दी गाना गीत कविता

पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती
आँखों की शर्म मुझे रोने नहीं देती।
पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती।।

किस से गम छुपाऊँ और किस को घाव दिखाऊं
इस पेट काटती भूख को कैसे मैं बहलाऊँ

समझ नही आता मुझे क्यों दो जून की रोटी मयस्सर नहीं होती
सुलगती भूख की मुलाक़ात रोटी के टुकड़े से अक्सर नहीं होती

इंसानियत बेचकर खा गया इंसान, हम मज़लूमों पर उनकी निगाह अक्सर नहीं होती
बेसहारा निराश्रित भूख से बिलबिलाते चेहरों पे, दर्द की शिकन रह गुज़र नहीं होती

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015-16
पेट की भूख मुझे सोने नहीं देती - नया  हिन्दी गाना गीत कविता



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Saturday, September 26, 2015

हकीम से ही ठन गई - नया हिन्दी गाना गीत कविता

हकीम से ही ठन गई

हकीम से ही ठन गई  - नया  हिन्दी गाना गीत कविता

ये सुनकर तो मेरी भौंहे तन गई।
उस नाकारा हकीम से ही ठन गई।

जो मेरी बिमारी को लाइलाज बताता है।
मोहब्बत नाम का रिवाज़ बताता है।

अब क्या करूं सारे ज़माने से दुश्मनी कैसे मौल लूँ।
अब हो गई मोहब्बत तो उसे तराजू में कैसे तौल लूँ।

ऐ ज़माने तू ही बता कोई कैसे जिए चला जाए?
जब खरामा खरामा इस दिल का सुकून चला जाए?

रचियता : आनन्द कवि आनन्द
आनन्द

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Wednesday, March 4, 2015

मैं क्यूँ बनूँ एक और निर्भया - नया हिन्दी गाना गीत कविता

मैं क्यूँ बनूँ एक और निर्भया?

मैं क्यूँ बनूँ एक और निर्भया - नया  हिन्दी गाना गीत कविता

सारे धरने, सरकारी वादे और कानून के बावजूद हर रोज एक और निर्भया
अब बहुत हो गया, इंसानियत से भरोसा खो गया, पानी सर से गुज़र गया
अब आप ही बताइये, मैं क्यूँ बनूँ एक और निर्भया?

इंसानी भेष में दरिंदे, विकृत मानसिकता के परिंदे, हैं मौके की तलाश में
यौन शोषण के कारिन्दे, वासना के अन्धे, लिप्त हैं विभत्स्ता और लाश में
अपनी आज़ादी, अपनी सुरक्षा का, मै खुद ही बनूँगी जरिया
तब आप ही बताइये, मैं क्यूँ बनूँ एक और निर्भया?

मेरी तरफ लपकते भेड़ियों को, अब मैं खुद ही धुल चटाउँगी
आत्मरक्षा का ले प्रशिक्षण, मैं खुद अपनी लाज बचाउंगी
किसी की बेटी, माँ बहिन किसी की, वधू किसी की और भार्या
फिर आप ही बताइये, मैं क्यूँ बनूँ एक और निर्भया?

इन शरीर के भूखे भेड़ियों को कोई पाठ पढ़ाये नैतिकता का
अबला नहीं मैं सबला हूँ, ले सबक नारी शक्ति और एकता का
ना हम भोग्या, ना हम कलियाँ, ना तितली ना परिया
निर्णय आप ही लीजिये, मैं क्यूँ बनूँ एक और निर्भया?

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015-16

मैं क्यूँ बनूँ एक और निर्भया - नया  हिन्दी गाना गीत कविता 

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