Wednesday, January 28, 2015

राष्ट्रभाषा हिंदी - नया हिन्दी गाना गीत कविता

राष्ट्रभाषा हिंदी

राष्ट्रभाषा हिंदी - नया  हिन्दी गाना गीत कविता

हिंदी अपनी राष्ट्रभाषा, हिंद है देश हमारा
चंहुमुखी विकास हो हिंदी का, यही देश का नारा

आओ मिलकर प्रण करें, हम राजभाषा अपनाएंगे
मन-वचन और कर्म से हिंदी का मान बढ़ाएंगे
आज़ादी से पहले का गौरव हिंदी को पुन: दिलाएंगे
यही महान है ध्येय हमारा, कहती संविधान की धारा
हिंदी अपनी राष्ट्रभाषा, हिंद है देश हमारा

बोलचाल की भाषा से उठकर, कार्यालिक भाषा हो हिंदी
हिन्दोस्तां के जन-जन की लेखन भाषा हो हिंदी
सरकारी कार्यालयों में भी, कामकाज़ की भाषा हो हिंदी
सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों की मातृभाषा हो हिंदी
हिन्दीं हैं हम, हिंदी है भाषा, गूंजे राष्ट्र हमारा
हिंदी अपनी राष्ट्रभाषा, हिंद है देश हमारा

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर, हिंदी का सम्मान हो
समझौता हो, या बैठक हो, हिंदी उसकी जान हो,
हर हिंदी का कर्त्तव्य है, हिंदी का उसे ज्ञान हो
शान हो हिंदी की विश्व में, ऐसा इसका उत्थान हो
गुणगान करे सारा विश्व, और ब्रहमांड में हो जयकारा
हिंदी अपनी राष्ट्रभाषा, हिंद है देश हमारा

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015
राष्ट्रभाषा हिंदी - नया  हिन्दी गाना गीत कविता
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गठबन्धन - नया हिन्दी गाना गीत कविता

गठबन्धन

गठबन्धन - नया  हिन्दी गाना गीत कविता

बगैर मेरी मर्ज़ी के एक इंच भर भी हिलो नहीं
चाहे जग रूठे या यारा, मेरे कहे से टलो नहीं
ग़र संभव नहीं ऐसा, तो तुम्हें समर्थन कैसा?
मैं समर्थन वापस लेता हूँ, वतन की बेहतरी के लिए

मेरे खिलाफ लगे आरोपों पर मिट्टी ढक दीजिये
लम्बित पड़े मुकदमों को ताक़ पर रख दीजिये
ग़र संभव नहीं ऐसा, तो तुम्हें समर्थन कैसा?
मैं समर्थन वापस लेता हूँ, क़ानून की बेहतरी के लिए

मेरी पार्टी के मंत्री को अमुक विभाग या फलां पद दीजिये
दूसरी पार्टी के मंत्री को घोषित विभाग तुरन्त रद्द कीजिये
ग़र संभव नहीं ऐसा, तो तुम्हें समर्थन कैसा?
मैं समर्थन वापस लेता हूँ, मन्त्रालय की बेहतरी के लिए

मेरे इलाक़े के लिए विशेष पैकेज घोषित कीजिये
भले ही सरे देश या अन्य प्रान्तों को शोषित कीजिये
ग़र संभव नहीं ऐसा, तो तुम्हें समर्थन कैसा?
मैं समर्थन वापस लेता हूँ, अपने इलाके की बेहतरी के लिए

अंधेर नगरी चौपट राजा फिर भी समर्थन दिया तुम्हे ताज़ा
अपनी गद्दी छोड़के राजा वैसा ही नाचो जैसा बजे बाजा
ग़र संभव नहीं ऐसा, तो तुम्हें समर्थन कैसा?
मैं समर्थन वापस लेता हूँ, गठबंधन सरकार के नैतिक मूल्यों की बेहतरी के लिए

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015
गठबन्धन - नया  हिन्दी गाना गीत कविता 

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माँ की अभिलाषा - नया हिन्दी गाना गीत कविता

माँ की अभिलाषा

माँ की अभिलाषा - नया हिन्दी गाना गीत कविता

भगवान तुम्हारे मंदिर में मैं एक ही विनती करती हूँ।
मेरी उम्मीद सरीखा पुत्र वर दो यही कामना करती हूँ।।

चाह नहीं कि मेरा पुत्र सुन्दर स्वस्थ बलवान हो,
ये भी मुझको चाह नहीं कि वो वीर शिवाजी समान हो,
मैं तो ये भी नहीं चाहती कि वो शिक्षक या विद्वान् हो,
और न ही किसी महफ़िल में उसकी कवियों जैसी शान हो,

सज्जनता की मूरत ना हो, भले आदमियों सी सूरत ना हो,
मातृभूमि का रक्षक ना हो, वीर लड़ाका युद्धरत्त ना हो,
सत्यता की मूरत ना हो, बात में उसकी सत्त ना हो,
किसी धर्म का अगुआ ना हो, उसके सम्मुख सत पथ ना हो,

तो फिर कैसा हो?

धूर्त लोभी लम्पट कपटी, दुर्जन सा हैवान हो,
काम क्रोधी जाहिल काहिल, गज भर की जुबान हो,
डाकू चोर लुटेरा ठग हो, सही मायनों में शैतान हो,
लूटपाट मारकाट उसके नाम की पहचान हो,

थाली का बैंगन हो, बेपैन्दी का लोटा हो,
झूठ का पुलिंदा हो, उसका हर कर्म खोटा हो,
राजनीतिक क़द ऊँचा हो, भले शरीर का छोटा हो,
आम आदमी को हरदम उसके दर्शनों का टोटा हो,

ताकि वो इन गुणों से सुसज्जित होकर राजनेता बन सके,
मक्कारी की चादर ओढ़े, जनता का चहेता बन सके,

क्योंकि आज के संसार में बाकी धंधे मंदे हैं,
जो राजनीति करने लगे, वो अक्लमन्द बन्दे हैं,
इनके सम्मुख नेत्रयुक्त भी आँखों से अन्धे हैं,
इनकी छवि साफ़ सुथरी, बाकि सब गंदे हैं,

भगवान तुम्हारे मंदिर में मैं एक ही विनती करती हूँ।
मेरी उम्मीद सरीखा पुत्र वर दो यही कामना करती हूँ।।

रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015
माँ की अभिलाषा - नया हिन्दी गाना गीत कविता 
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