🔬 हरयाणवी रागणी परंपरा, पिंगल शास्त्र और लोक-सांस्कृतिक चेतना पर एक युगांतरकारी शोध कार्य! 🎓
प्रख्यात शोधकर्ता, लेखक एवं भारतीय वायु सेना (IAF) के पूर्व जाबांज आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) जी द्वारा लिखित उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र (Research Papers) शोधार्थियों और लोक-साहित्य के अनुरागी पाठकों के लिए उपलब्ध हैं!
वर्ष 2026 में प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स (जैसे The Academic, ShodhPatra (SPIJSH), IJCRT, IJRAR, JETIR, IJIR T आदि) में प्रकाशित ये शोध-पत्र हरयाणवी रागणी, सांग-शैली और पिंगल शास्त्र के वैज्ञानिक व सांस्कृतिक अध्ययन को एक नया आयाम प्रदान करते हैं।
📚 प्रमुख शोध-पत्र एवं विषय (Key Research Areas):
- पिंगल शास्त्र एवं सांग-शैली (अधराजण रागणी अध्ययन):
- अधराजण (रसकपूर) केंद्रित हरियाणवी सांग-शैली रागणियों का पिंगल शास्त्रीय व लोक-सांस्कृतिक विश्लेषण (रागणी 1–8, 9–16, 17–23 और 24–30 के विशेष संदर्भ में)।
- हीर-राँझा की रागणी परंपरा:
- हीर-राँझा आख्यान की रागणियों (रागणी 1–7, 8–16, 17–22 और 23–28) का पिंगल छंद और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में गहन समालोचनात्मक विश्लेषण।
- किस्सा भगत पूरणमल (भक्ति और नैतिक प्रतिरोध):
- 'किस्सा भगत पूरणमल' की रागणियों (रागणी 1–8 एवं 9–18) में भक्ति भाव, नैतिक प्रतिरोध और पिंगल छंद विधान का अध्ययन।
- स्त्री-सामर्थ्य, लोक-चेतना और सामाजिक प्रतिरोध:
- सांस्कृतिक, वेदांत एवं सामाजिक आयाम:
- Cultural Anxiety and Ethical Selfhood
- Pedagogical Memorials, Vedantic Consciousness and Ethical Selfhood
✨ हरयाणवी लोक-साहित्य, छंद-शास्त्र (Prosody) और सांस्कृतिक समाजशास्त्र में शोध कर रहे शोधार्थियों, प्रोफेसरों और साहित्य-प्रेमियों के लिए यह संपूर्ण शोध-श्रृंखला अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक है।
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