Tuesday, November 3, 2026

ज़ेनोडो (Zenodo) पर प्रकाशित प्रख्यात शोध-पत्र: लोक-संस्कृति, पिंगल शास्त्र और हरयाणवी रागणी परंपरा का अकादमिक दस्तावेजीकरण - आनन्द कुमार आशोधिया

ज़ेनोडो (Zenodo) पर प्रकाशित प्रख्यात शोध-पत्र: लोक-संस्कृति, पिंगल शास्त्र और हरयाणवी रागणी परंपरा का अकादमिक दस्तावेजीकरण

🌐 ज़ेनोडो (Zenodo) पर प्रकाशित प्रख्यात शोध-पत्र: लोक-संस्कृति, पिंगल शास्त्र और हरयाणवी रागणी परंपरा का अकादमिक दस्तावेजीकरण 📚


भारतीय वायु सेना (IAF) के पूर्व जाबांज, स्वतंत्र शोधकर्ता और प्रख्यात साहित्यकार आनन्द कुमार आशोधिया (Anand Kumar Ashodhiya) जी द्वारा रचित एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध-पत्रों का यह संग्रह अब वैश्विक ओपन-एक्सेस रिपॉजिटरी Zenodo पर भी उपलब्ध है।

यह शोध-श्रृंखला हरयाणवी सांग-शैली, लोक-साहित्य, पिंगल शास्त्र (छंद-विधान) और सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना का अत्यंत गहन और अंतर्विषयी (interdisciplinary) विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

🔬 प्रमुख शोध-पत्र एवं विषय-क्षेत्र (Key Research Areas on Zenodo):

  • सांस्कृतिक संक्रमण, पारिस्थितिकी और डिजिटल युग:

    • Cultural Transition, Ecological Anxiety, and Digital Alienation in Contemporary Haryanvi Ragni Tradition (IJRAR) — आधुनिकता, तकनीक, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन के अंतर्संबंधों का लोक-साहित्य के आईने में विश्लेषण।

    • Cultural Anxiety and Ethical Selfhood in Contemporary Haryanvi Ragni Traditions (The Academic) — नैतिक आत्म और सांस्कृतिक सरोकारों की अभिव्यक्ति।

  • स्त्री-विमर्श, सामाजिक प्रतिरोध और पिंगल शास्त्र:

    • Feminine Trauma, Cultural Resistance, and Pingal-Structured Social Consciousness in Contemporary Haryanvi Ragni Tradition (SPIJSH) — समकालीन रागणियों में स्त्री-पीड़ा, सांस्कृतिक प्रतिरोध और सामाजिक चेतना का पिंगल-शास्त्रीय अध्ययन।

    • Social Resistance, Ethical Consciousness and Pingal Prosody in Contemporary Haryanvi Ragni (IJIRT) — लोक-माध्यमों से भ्रष्टाचार, लोभ और सामाजिक विसंगतियों पर वैचारिक प्रहार।

  • सैन्य चेतना, राष्ट्रप्रेम और विरह काव्य (अविकावनी corpus):

  • अधराजण सांग-शैली और पिंगल विश्लेषण:

    • अधराजण (रसकपूर) केंद्रित रागणियों (रागणी 1 से 30 तक) का पिंगल छंद-विधान, यति-संरचना और लोक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में समग्र विश्लेषणात्मक अध्ययन (प्रकाशित: JETIR, IJCRT, Research Review, ShodhPatra)।

  • हीर-राँझा एवं किस्सा भगत पूरणमल की रागणी परंपरा:

    • अमर प्रेम कथा 'हीर-राँझा' (रागणी 1 से 28) और 'किस्सा भगत पूरणमल' (भक्ति और नैतिक प्रतिरोध) का पिंगल शास्त्र के आलोक में सांस्कृतिक व साहित्यिक विश्लेषण।

  • वेदांत और दार्शनिक चेतना:

    • Pedagogical Memorials, Vedantic Consciousness and Ethical Selfhood in Contemporary Haryanvi Ragni Tradition (IJCRT) — गुरु-वंदना, आध्यात्मिक चेतना और लोक-दर्शन का अध्ययन।

✨ हरयाणवी लोक-साहित्य, छंद-शास्त्र, मौखिक परंपराओं (Oral Traditions) और उत्तर भारतीय लोक-संस्कृति पर शोध कर रहे विद्यार्थियों और शिक्षाविदों के लिए यह ओपन-एक्सेस शोध भंडार एक अत्यंत मूल्यवान अकादमिक स्रोत है।

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अन्तर्मन की यात्रा — हिन्दी काव्य संग्रह : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

अन्तर्मन की यात्रा — हिन्दी काव्य संग्रह

Antarman Ki Yatra — राष्ट्र-चेतना, आत्म-बोध, सामाजिक यथार्थ और लोक-संवेदना की कविताएँ

अन्तर्मन की यात्रा — हिन्दी काव्य संग्रह : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

पुस्तक विवरण

विवरणजानकारी
शीर्षक (वैकल्पिक वर्तनी)अन्तर्मन की यात्रा / अंतर्मन की यात्रा
अंग्रेज़ी शीर्षकAntarman Ki Yatra
लेखकआनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)
भाषाहिन्दी
पृष्ठ संख्या (ई-बुक)117
प्रकाशन वर्ष2026
ISBN978-93-345-4990-4
विधाहिन्दी काव्य संग्रह · समकालीन कविता
प्रकाशकअविकावनी पब्लिशर्स (Avikavani Publishers)

पुस्तक के बारे में

“अन्तर्मन की यात्रा” आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) का हिन्दी काव्य-संग्रह है। इसकी कविताएँ मनुष्य के भीतर की मौन संवेदनाओं और बाहरी सामाजिक यथार्थ के टकराव से उपजी हैं। संग्रह में जीवन के विविध अनुभव, सैन्य जीवन से जुड़ा राष्ट्र-समर्पण और हरियाणा की लोक-सांस्कृतिक परंपरा की छाप मिलती है।

पुस्तक के पाँच खंड

  1. राष्ट्र-वंदना। सैन्य जीवन के अनुभवों से जुड़ी ओजस्वी कविताएँ। ‘परमवीर चक्र विजेता निर्मलजीत सिंह सेखों’ और ‘अग्निवीर’ जैसी रचनाएँ सशस्त्र सेनाओं के पराक्रम को स्वर देती हैं।
  2. आत्म-बोध और दार्शनिक चिंतन। ‘वक़्त’ और ‘सवेरा’ जैसी रचनाएँ मौन, काल-चक्र और आत्म-साक्षात्कार पर शांत, गंभीर चिंतन करती हैं।
  3. मानवीय संवेदनाएँ। पारिवारिक आत्मीयता, वात्सल्य और संघर्षों के बीच आशा की कविताएँ।
  4. सामाजिक विसंगतियाँ। ‘सड़क पे जन्मे बच्चे की पुकार’, ‘बचपन’, ‘दहेज’, ‘मंगली’ और ‘रील का मायाजाल’ जैसी कविताएँ कन्या भ्रूण-हत्या, दहेज, मिलावटख़ोरी, अंधविश्वास और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया जैसे विषयों पर प्रश्न उठाती हैं।
  5. लोक-संस्कृति और पिंगल अनुशासन। पं. लखमीचंद, माँगेराम और गुरु पालेराम दहिया (हलालपुरिया) की परंपरा से प्रेरित काव्य-शिल्प, जिसमें पिंगल शास्त्र के नियमों (लय, मात्रा, छंद और तुकांत) का पालन किया गया है।

किनके लिए

यह संग्रह हिन्दी कविता के उन पाठकों के लिए है जो ओजस्वी राष्ट्र-स्वर, आत्म-चिंतन, सामाजिक प्रश्नों और छंद-अनुशासन से जुड़ी लोक-काव्य परंपरा में रुचि रखते हैं।

लेखक परिचय

आनन्द कुमार आशोधिया (‘कवि आनन्द शाहपुर’) स्वतंत्र लेखक, कवि और शोधार्थी हैं। वे हरियाणवी भाषा, लोक-काव्यशास्त्र, पिंगल शास्त्र और वाचिक परंपराओं के दस्तावेज़ीकरण पर कार्य करते हैं। उनके शोध-परिचय के लिए यहाँ देखें।

उद्धरण कैसे दें

Ashodhiya, Anand Kumar. (2026). Antarman Ki Yatra. Avikavani Publishers.

उपलब्धता

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Thursday, October 29, 2026

हरयाणवी रागणी परंपरा, पिंगल शास्त्र और लोक-सांस्कृतिक चेतना पर एक युगांतरकारी शोध कार्य : आनन्द कुमार आशोधिया

हरयाणवी रागणी परंपरा, पिंगल शास्त्र और लोक-सांस्कृतिक चेतना पर एक युगांतरकारी शोध कार्य : आनन्द कुमार आशोधिया

🔬 हरयाणवी रागणी परंपरा, पिंगल शास्त्र और लोक-सांस्कृतिक चेतना पर एक युगांतरकारी शोध कार्य! 🎓


प्रख्यात शोधकर्ता, लेखक एवं भारतीय वायु सेना (IAF) के पूर्व जाबांज आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) जी द्वारा लिखित उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र (Research Papers) शोधार्थियों और लोक-साहित्य के अनुरागी पाठकों के लिए उपलब्ध हैं!

वर्ष 2026 में प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स (जैसे The Academic, ShodhPatra (SPIJSH), IJCRT, IJRAR, JETIR, IJIR T आदि) में प्रकाशित ये शोध-पत्र हरयाणवी रागणी, सांग-शैली और पिंगल शास्त्र के वैज्ञानिक व सांस्कृतिक अध्ययन को एक नया आयाम प्रदान करते हैं।

📚 प्रमुख शोध-पत्र एवं विषय (Key Research Areas):

  • पिंगल शास्त्र एवं सांग-शैली (अधराजण रागणी अध्ययन):

    • अधराजण (रसकपूर) केंद्रित हरियाणवी सांग-शैली रागणियों का पिंगल शास्त्रीय व लोक-सांस्कृतिक विश्लेषण (रागणी 1–8, 9–16, 17–23 और 24–30 के विशेष संदर्भ में)।

  • हीर-राँझा की रागणी परंपरा:

    • हीर-राँझा आख्यान की रागणियों (रागणी 1–7, 8–16, 17–22 और 23–28) का पिंगल छंद और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में गहन समालोचनात्मक विश्लेषण।

  • किस्सा भगत पूरणमल (भक्ति और नैतिक प्रतिरोध):

    • 'किस्सा भगत पूरणमल' की रागणियों (रागणी 1–8 एवं 9–18) में भक्ति भाव, नैतिक प्रतिरोध और पिंगल छंद विधान का अध्ययन।

  • स्त्री-सामर्थ्य, लोक-चेतना और सामाजिक प्रतिरोध:

  • सांस्कृतिक, वेदांत एवं सामाजिक आयाम:

✨ हरयाणवी लोक-साहित्य, छंद-शास्त्र (Prosody) और सांस्कृतिक समाजशास्त्र में शोध कर रहे शोधार्थियों, प्रोफेसरों और साहित्य-प्रेमियों के लिए यह संपूर्ण शोध-श्रृंखला अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक है।

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