Friday, November 6, 2026

थारा मुद्दा थारी बात — छंदमुक्त हरियाणवी कविताओं का सामाजिक दस्तावेज़ : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

थारा मुद्दा थारी बात — छंदमुक्त हरियाणवी कविताओं का सामाजिक दस्तावेज़ : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

Thara Mudda Thari Baat — छंदमुक्त हरियाणवी कविताओं का सामाजिक दस्तावेज़

थारा मुद्दा थारी बात — छंदमुक्त हरियाणवी कविताओं का सामाजिक दस्तावेज़ : लेखक	आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

पुस्तक विवरण

विवरणजानकारी
अंग्रेज़ी शीर्षकThara Mudda Thari Baat
लेखकआनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)
भाषाहरियाणवी / हिन्दी
पृष्ठ संख्या129
ISBN978-81-989952-2-3
विधाआधुनिक हरियाणवी काव्य · छंदमुक्त लघुकविता · सामाजिक चेतना
शैक्षणिक क्षेत्रआधुनिक हरियाणवी साहित्य, ग्रामीण समाजशास्त्र, समकालीन सामाजिक आंदोलन, छंदमुक्त कविता, जनसंवाद
प्रकाशकएस. जैन पब्लिकेशन (SJain Publication)

पुस्तक के बारे में

“थारा मुद्दा थारी बात” सामाजिक चेतना से ओतप्रोत एक विशिष्ट हरियाणवी छंदमुक्त लघु-कविता संग्रह है, जो केवल हरियाणा तक सीमित न रहकर पूरे ग्रामीण और कस्बाई भारत के 25 प्रमुख सामाजिक मुद्दों को उजागर करता है। कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, बेरोज़गारी, जल संकट, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और बाल श्रम जैसे ज्वलंत विषयों पर केंद्रित ये 100 लघुकविताएँ लोकभाषा की आंतरिक शक्ति में रची-बसी हैं।

भाषा, शिल्प और सरोकार

  • छंदमुक्त हरियाणवी विधान: पारंपरिक रागनी छंदों से इतर, यह संग्रह आधुनिक छंदमुक्त शैली में हरियाणवी बोली की संवेदनात्मक गहराई और अभिव्यंजना क्षमता को सिद्ध करता है।
  • आईना और समाधान: लेखक की दृष्टि केवल समस्याओं के चित्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संवाद, सुधार और नीतिपरक दृष्टिकोण का निर्माण करती है।
  • जन-आवाज़ का प्रलेखन: प्रत्येक कविता समाज की पीड़ा, सामूहिक प्रश्न और लोक-चेतना की सशक्त पुकार बनकर उभरती है।

उद्धरण कैसे दें

Ashodhiya, Anand Kumar. (2024). Thara Mudda Thari Baat: Chhandmukt Haryanvi Kavitayon Ka Samajik Dastaavez. SJain Publication.

उपलब्धता

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Thursday, November 5, 2026

SĀKET: An English Transcreation : Author - Anand Kumar Ashodhiya

 SĀKET: An English Transcreation

Discover the Unheard Voices of the Ramayana — An English Verse Transcreation of Maithili Sharan Gupt’s Modern Epic

SĀKET: An English Transcreation : Author Anand Kumar Ashodhiya

Book Details

FieldValue
TitleSĀKET: An English Transcreation
AuthorAnand Kumar Ashodhiya
Original WorkSāket by Rashtrakavi Maithili Sharan Gupt
LanguageEnglish
Print Length148 pages
Publication Date25 November 2025
ISBN-13978-93-5469-845-3
GenreEpic Poetry · Transcreation · Feminist Literature · Spiritual Narrative
Academic AreasModern Indian Literature, Comparative Literature, Translation Studies, Ramayana Traditions, Gender Studies
PublisherAvikavani Publishers

About the Book

SĀKET: An English Transcreation is a literary bridge making Maithili Sharan Gupt’s celebrated 20th-century Hindi epic accessible to global readers. Widely regarded as a landmark in modern Indian literature, Sāket shifts the epic gaze away from the battlefields of Lanka to the domestic and spiritual core of Ayodhya, illuminating the silent suffering and moral agency of women whose sacrifices sustained the Dharma.

A Testament to Silence and Sacrifice

  • Urmila (The Embodiment of Viraha): When Lakshmana joins Rama in exile, Urmila voluntarily embraces fourteen years of conscious separation (viraha). Gupt elevates her quiet vigil, internal asceticism, and spiritual fortitude into the sublime core of the epic.
  • Kaikeyi (The Path to Repentance): Moving beyond conventional villainization, the narrative portrays Kaikeyi’s intense internal remorse, psychological complexity, and earnest quest for spiritual redemption.

Beyond Mere Translation: A Transcreation

This volume captures the emotional gravity, rhythm, and philosophical depth of Gupt’s original Khariboli verse. It incorporates contextual cultural annotations, offering readers an accessible path into the spiritual and metaphorical dimensions of classical Indian epic traditions.

Suggested Citation

Ashodhiya, Anand Kumar. (2025). SĀKET: An English Transcreation. Avikavani Publishers.

Availability

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धूप के पाँव — आधुनिक अतुकांत एवं छंदमुक्त हिंदी कविता संग्रह : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

धूप के पाँव — आधुनिक अतुकांत एवं छंदमुक्त हिंदी कविता संग्रह

Dhoop Ke Paanv (Dhoop Ke Paon) — प्रकृति, श्रम, संबंध और आत्म-साक्षात्कार की 101 कविताएँ

धूप के पाँव — आधुनिक अतुकांत एवं छंदमुक्त हिंदी कविता संग्रह : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

पुस्तक विवरण

विवरणजानकारी
शीर्षकधूप के पाँव
अंग्रेज़ी शीर्षकDhoop Ke Paanv (Dhoop Ke Paon)
लेखकआनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)
भाषाहिन्दी
कविताओं की संख्या101
प्रकाशन वर्ष2026
ISBN978-93-345-7574-3
विधाआधुनिक अतुकांत एवं छंदमुक्त कविता
प्रकाशकअविकावनी पब्लिशर्स (Avikavani Publishers)

पुस्तक के बारे में

“धूप के पाँव” आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) का अतुकांत एवं छंदमुक्त हिन्दी कविता-संग्रह है। लेखक का पूर्व कार्य पिंगल शास्त्र और रागनी परंपरा की छंदबद्ध रचनाओं पर केंद्रित रहा है। इस संग्रह में उन्होंने जान-बूझकर छंद और तुकांत के बंधन छोड़े हैं। इसकी 101 कविताएँ बाहरी तुकबंदी की जगह विचार की आंतरिक लय, बिंबों और यथार्थ-बोध पर टिकी हैं।

संग्रह में ‘धूप’ केवल रोशनी का प्रतीक नहीं, समय की निरंतर पदचाप है। वह सुबह की गुनगुनी छुअन के रूप में उम्मीद जगाती है, दोपहर में श्रम और संघर्ष की तपन बनती है, और ढलती सांझ में एकांत छोड़ जाती है।

संग्रह के प्रमुख विषय

  1. प्रकृति और परिंदों का भूगोल। ‘तिनके का भूगोल’, ‘नन्हीं चोंच का विहान’, ‘डाल का कंपन’ और ‘परिंदों की संगति’ जैसी कविताएँ फैलते कंक्रीट के बीच प्राकृतिक आवास के सिमटने और सांस लेने की जद्दोजहद को चित्रित करती हैं।
  2. कंक्रीट का संत्रास और सामाजिक विसंगतियाँ। ‘चौपाल का मौन’, ‘दूरियों का पुल’, ‘माँ की थाली’, ‘पुराना सहारा’ और ‘वृद्ध आँखों का विश्राम’ में आधुनिक जीवन की उस उपेक्षित पीड़ा को स्वर दिया गया है, जो भौतिक प्रगति के शोर में दब जाती है।
  3. श्रम, संघर्ष और अस्तित्व। ‘खेत में पकता सोना’, ‘थके मजदूर का संसार’, ‘पगडंडी का अकेलापन’ और ‘धूल का बवंडर’ आम आदमी के पसीने, संघर्ष और जिजीविषा को सीधे ढंग से सामने रखती हैं।
  4. दार्शनिक अंतर्दर्शन और आत्म-साक्षात्कार। ‘दूधिया खामोशी’, ‘अक्स का सच’, ‘रेत की प्यास’, ‘सन्नाटे की नाव’ और ‘आधी रात की चौंक’ जैसी कविताएँ व्यक्ति को सामाजिक मुखौटों से हटाकर उसके भीतर के मौन एकांत से जोड़ती हैं।

अतुकांत और छंदमुक्त कविता: संक्षेप में

छंदमुक्त होने का अर्थ यहाँ शिल्प की अनदेखी नहीं है। कविता बाहरी ढाँचे के बजाय भाव और विचार की आंतरिक लय को साधती है। इन कविताओं में शब्दों का चयन तुकांत मिलाने के लिए नहीं, बल्कि अलगाव, पीड़ा और संघर्ष जैसे अनुभवों को सीधे व्यक्त करने के लिए किया गया है।

किनके लिए

यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो समकालीन हिन्दी कविता में प्रकृति, बदलते मानवीय संबंधों, श्रम और आत्म-चिंतन के विषयों में रुचि रखते हैं, और छंदमुक्त काव्य-शिल्प को पढ़ना चाहते हैं।

लेखक परिचय

आनन्द कुमार आशोधिया (‘कवि आनन्द शाहपुर’) स्वतंत्र लेखक, कवि और शोधार्थी हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना में 32 वर्ष सेवा की। वे हरियाणवी लोक-काव्यशास्त्र, पिंगल शास्त्र, भाषा-विज्ञान और वाचिक परंपराओं के दस्तावेज़ीकरण पर कार्य करते हैं। उनके शोध-परिचय के लिए यहाँ देखें।

उद्धरण कैसे दें

Ashodhiya, Anand Kumar. (2026). Dhoop Ke Paanv. Avikavani Publishers.

उपलब्धता

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