🌐 ज़ेनोडो (Zenodo) पर प्रकाशित प्रख्यात शोध-पत्र: लोक-संस्कृति, पिंगल शास्त्र और हरयाणवी रागणी परंपरा का अकादमिक दस्तावेजीकरण 📚
🔬 प्रमुख शोध-पत्र एवं विषय-क्षेत्र (Key Research Areas on Zenodo):
- सांस्कृतिक संक्रमण, पारिस्थितिकी और डिजिटल युग:
- Cultural Transition, Ecological Anxiety, and Digital Alienation in Contemporary Haryanvi Ragni Tradition (IJRAR) — आधुनिकता, तकनीक, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन के अंतर्संबंधों का लोक-साहित्य के आईने में विश्लेषण।
- Cultural Anxiety and Ethical Selfhood in Contemporary Haryanvi Ragni Traditions (The Academic) — नैतिक आत्म और सांस्कृतिक सरोकारों की अभिव्यक्ति।
- स्त्री-विमर्श, सामाजिक प्रतिरोध और पिंगल शास्त्र:
- Feminine Trauma, Cultural Resistance, and Pingal-Structured Social Consciousness in Contemporary Haryanvi Ragni Tradition (SPIJSH) — समकालीन रागणियों में स्त्री-पीड़ा, सांस्कृतिक प्रतिरोध और सामाजिक चेतना का पिंगल-शास्त्रीय अध्ययन।
- Social Resistance, Ethical Consciousness and Pingal Prosody in Contemporary Haryanvi Ragni (IJIRT) — लोक-माध्यमों से भ्रष्टाचार, लोभ और सामाजिक विसंगतियों पर वैचारिक प्रहार।
- सैन्य चेतना, राष्ट्रप्रेम और विरह काव्य (अविकावनी corpus):
- War, Viraha, Folk Feminine Consciousness and Pingal Poetics in Contemporary Haryanvi Ragni Tradition (JETIR) — गलवान घाटी, सैन्य बलिदान, पारिवारिक आत्मीयता और वीर-करुण रसों का लोक-शास्त्रीय विवेचन।
- अधराजण सांग-शैली और पिंगल विश्लेषण:
- अधराजण (रसकपूर) केंद्रित रागणियों (रागणी 1 से 30 तक) का पिंगल छंद-विधान, यति-संरचना और लोक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में समग्र विश्लेषणात्मक अध्ययन (प्रकाशित: JETIR, IJCRT, Research Review, ShodhPatra)।
- हीर-राँझा एवं किस्सा भगत पूरणमल की रागणी परंपरा:
- अमर प्रेम कथा 'हीर-राँझा' (रागणी 1 से 28) और 'किस्सा भगत पूरणमल' (भक्ति और नैतिक प्रतिरोध) का पिंगल शास्त्र के आलोक में सांस्कृतिक व साहित्यिक विश्लेषण।
- वेदांत और दार्शनिक चेतना:
- Pedagogical Memorials, Vedantic Consciousness and Ethical Selfhood in Contemporary Haryanvi Ragni Tradition (IJCRT) — गुरु-वंदना, आध्यात्मिक चेतना और लोक-दर्शन का अध्ययन।


