Thursday, October 22, 2026

हरयाणवी लोक-बोलियों, हिंदी और अंग्रेजी का अनूठा और प्रामाणिक त्रिभाषी संगम : आनन्द कुमार आशोधिया (Anand Kumar Ashodhiya)

📚 हरयाणवी लोक-बोलियों, हिंदी और अंग्रेजी का अनूठा और प्रामाणिक त्रिभाषी संगम! 📖


लोक-संस्कृति और भाषा-चिंतन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कार्य—लेखक, शोधकर्ता एवं भारतीय वायु सेना (IAF) के पूर्व जाबांज आनन्द कुमार आशोधिया (Anand Kumar Ashodhiya) 'कवि आनंद शाहपुर' जी की बहुचर्चित कृति:

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अविकावनी हरयाणवी रागणी संग्रह : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

अविकावनी हरयाणवी रागणी संग्रह

Avikavani Haryanvi Ragni Sangrah — सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक प्रतिरोध और भक्ति की लोकगाथा

अविकावनी हरयाणवी रागणी संग्रह : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

पुस्तक विवरण

विवरणजानकारी
अंग्रेज़ी शीर्षकAvikavani Haryanvi Ragni Sangrah
लेखकआनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)
भाषाहिन्दी / हरियाणवी
पृष्ठ संख्या264 (प्रिंट संस्करण: 262)
प्रकाशन तिथि29 सितम्बर 2025
ISBN978-93-344-2403-4
विधालोककाव्य (रागनी संग्रह) · सामाजिक चेतना · भक्ति-काव्य · सांस्कृतिक विमर्श
शैक्षणिक क्षेत्रहरियाणवी लोक-साहित्य, वाचिक परंपरा, लोक-संस्कृति, समाजभाषाविज्ञान, छंद-विधान
प्रकाशकअविकावनी पब्लिशर्स (Avikavani Publishers)

पुस्तक के बारे में

“अविकावनी हरयाणवी रागणी संग्रह” केवल लोकगीतों का संकलन नहीं, बल्कि हरियाणा की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक धड़कन और सामाजिक चेतना का जीवंत दस्तावेज़ है। लेखक आनन्द कुमार आशोधिया ने हरियाणवी रागणी की पारंपरिक लोकध्वनि को समकालीन सोच, आध्यात्मिक गहराई और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ा है। प्रत्येक रचना के साथ प्रस्तुत किया गया भाव-वक्तव्य पाठकों को रचना के मूल मर्म और अंतर्निहित संवेदना से जोड़ता है।

प्रमुख वैचारिक एवं संवेदनात्मक आयाम

  • भक्ति और आध्यात्मिकता: “बम लहरी” और “दक्ष प्रजापति जयंती” जैसी रचनाएँ शिवभक्ति और धार्मिक इतिहास को लोकबोली में प्रतिष्ठित करती हैं, जिससे जनमानस में लोक-श्रद्धा और आस्था का संचार होता है।
  • सामाजिक प्रतिरोध और सुधार: “किस्सा शाही लकड़हारा” में नारी गरिमा, स्वाभिमान और सहभागिता की पुकार है, वहीं “इंटरनेट मोबाइल खतरा” और “बदल गया इन्सान” जैसी रचनाएँ आधुनिकता के नाम पर फैलती सामाजिक विकृतियों, नैतिक पतन और पाखंड पर करारा व्यंग्य करती हैं।
  • सांस्कृतिक पुनरुद्धार और अस्मिता: यह संग्रह भूले-बिसरे लोक-नायकों, ग्रामीण जीवन के नैतिक मूल्यों और पारंपरिक विरासत को पुनर्जीवित कर हरियाणवी अस्मिता पर गर्व करने की प्रेरणा देता है।
  • काव्य-शिल्प एवं परिष्कार: लेखक की तीन दशकों से अधिक की निरंतर साहित्यिक साधना इस संग्रह में स्पष्ट दिखाई देती है, जहाँ गेयता, छंद-शुद्धता और संप्रेषणीयता का उत्कृष्ट संतुलन साधा गया है।

“हरियाणवी रागणी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जन-मन की चेतना, सामाजिक संवाद और सांस्कृतिक प्रतिरोध का सशक्त माध्यम है।”

उद्धरण कैसे दें

Ashodhiya, Anand Kumar. (2025). Avikavani Haryanvi Ragni Sangrah. Avikavani Publishers.

उपलब्धता

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Wednesday, October 21, 2026

प्रेम के सौ रंग — आधुनिक हिंदी लघुकविता : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

प्रेम के सौ रंग — आधुनिक हिंदी लघुकविता

Prem Ke Sau Rang — मानवीय संवेदना, सामाजिक चेतना एवं आत्मिक संवाद की लघुकविताएँ

प्रेम के सौ रंग — आधुनिक हिंदी लघुकविता : लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)

पुस्तक विवरण

विवरणजानकारी
अंग्रेज़ी शीर्षकPrem Ke Sau Rang — Modern Hindi Short Poetry
लेखकआनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)
भाषाहिन्दी
पृष्ठ संख्या122
प्रकाशन वर्ष2025
ISBN978-93-344-5526-7
विधाआधुनिक लघुकविता · समकालीन काव्य · भाव एवं विचार-विमर्श
शैक्षणिक क्षेत्रसमकालीन हिन्दी साहित्य, लघुकविता विधा, सौंदर्यशास्त्र, सामाजिक चेतना, आधुनिक संवेदना
प्रकाशकअविकावनी पब्लिशर्स (Avikavani Publishers)

पुस्तक के बारे में

“प्रेम के सौ रंग — आधुनिक हिंदी लघुकविता” लेखक आनन्द कुमार आशोधिया द्वारा रचित एक सौ लघुकविताओं का संवेदनशील संग्रह है, जो प्रेम को केवल वैयक्तिक या रोमांटिक भाव तक सीमित न रखकर उसे सामाजिक, आध्यात्मिक और मानवीय उत्तरदायित्व के रूप में प्रस्तुत करता है। यह संग्रह समकालीन हिन्दी साहित्य में लघुकविता विधा की सघनता, शक्ति और संप्रेषणीयता को प्रामाणिक रूप से रेखांकित करता है।

विद्वत् समीक्षा एवं सम्मतियाँ

  • भूमिका (अशोक कुमार जाखड़ ‘निस्वार्थी’): वरिष्ठ साहित्यकार अशोक कुमार जाखड़ ‘निस्वार्थी’ के अनुसार यह संग्रह केवल सौ कविताएँ नहीं, बल्कि समाज, परिवेश और आत्मचिंतन की सौ जीवंत बूँदें हैं—जो मौन में मुखरता और शब्दों में गहन संवेदना का संचार करती हैं।
  • प्रस्तावना (प्रो. रूप देवगुण): प्रो. रूप देवगुण ने इसे हिन्दी की लोकसंवेदना की आत्मा निरूपित करते हुए स्पष्ट किया है कि ये रचनाएँ प्रेम को सामाजिक चेतना, मातृत्व, त्याग, बलिदान और आत्म-साधना के विराट परिप्रेक्ष्य में देखती हैं।
  • समीक्षात्मक दृष्टि (डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा): डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा इसे सौंदर्य और समाज का साझा दस्तावेज़ मानते हैं। कवि ने लघुता में विराटता साधते हुए आठ-दस पंक्तियों में एक मुकम्मल विचार, कहानी या भावनात्मक क्षण को संपूर्णता प्रदान की है।

काव्य-शिल्प और संवेदना

संग्रह में प्रयुक्त बिम्ब जैसे ‘बलिदान की लौ’, ‘वर्दी में गर्व’, और ‘शांति का स्वर’ हृदय को सीधे स्पर्श करते हैं। यह कृति उन पाठकों के लिए एक अनिवार्य संकलन है जो प्रेम को विचार, उत्तरदायित्व और आत्मिक संवाद के रूप में अनुभव करना चाहते हैं।

उद्धरण कैसे दें

Ashodhiya, Anand Kumar. (2025). Prem Ke Sau Rang: Adhunik Hindi Laghukavita. Avikavani Publishers.

उपलब्धता

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